फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: राजधानी में नए श्रम कानूनों के खिलाफ मजदूरों का हल्ला बोल

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार पर बंधुआ मजदूरी थोपने का आरोप, पुराना बस अड्डा से सीटीओ चौक तक निकाली रैली
विज्ञापन

30 हजार न्यूनतम वेतन देने, ठेका प्रथा खत्म करने का आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय स्तर की फेडरेशन के संयुक्त मंच के आह्वान पर वीरवार को राजधानी शिमला में चार लेबर कोड के विरोध में प्रदर्शन कर और रैलियां निकालीं गईं।

मजदूरों के विभिन्न संगठनों ने मिलकर सीटू के बैनर तले पुराने बस अड्डे से कार्ट रोड, सब्जी मंडी से नाज और वहां से लोअर बाजार होते हुए सीटीओ चौक तक रैली निकाली तथा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में राजधानी के आईजीएमसी, केएनएच, चमयाना, मानसिक रोगियों के अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल के कांट्रेक्ट वर्कर, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, होटल, तहबाजारी, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, नगर निगम शिमला की सैहब सोसायटी, विशाल मेगामार्ट, कालीबाड़ी मंदिर के मजदूरों ने भाग लिया। इस दौरान केंद्र सरकार के नए लेब कोड और श्रम कानूनों का विरोध किया गया। मजदूर नेताओं ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने चार लेबर कोड को कानून का रूप देकर मजदूरों को गुलाम बनाने की कोशिश की है। इससे बंधुआ मजदूरी बढ़ेगी।
विज्ञापन

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देने, आउटसोर्स और ठेका प्रथा खत्म करने, मल्टी टास्क, टेंपररी, कैजुअल, ट्रेनी की जगह नियमित रोजगार देने की मांगें उठाईं। इसके अलावा मनरेगा कानून को खत्म करके वीबी राम जी लागू करने का भी विरोध किया। इसके अलावा केंद्र सरकार से श्रमिक कल्याण बोर्ड का आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने, अमेरिका द्वारा भारत पर थोपे 18 प्रतिशत टैरिफ को खत्म करने, फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने का आग्रह किया। प्रदर्शन में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, एलआईसी नेता प्रदीप मिन्हास, दीक्षांत ठाकुर, चमन ठाकुर, रमाकांत मिश्रा, विवेक कश्यप, मीनाक्षी ठाकुर, शांति देवी, अनिल ठाकुर, रंजना जरेट, एडवोकेट सुरेंद्र वर्मा, प्रताप चौहान, वीरेंद्र लाल, प्रवीण शर्मा, ओमप्रकाश गर्ग और दलीप सिंह ने हिस्सा लिया।


मजदूरों को गुलाम बनाने का प्रयास : मेहरा
मेहरा ने कहा कि लेबर कोड लागू करने से 70 फीसदी उद्योग और 74 फीसदी मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। यह मजदूरों को गुलाम बनाने की कोशिश है। इसमें मजदूरों को अपने हक के लिए लड़ने या आवाज उठाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया है। इससे अस्थायी रोजगार, ठेका प्रथा, फिक्स टर्म रोजगार बढ़ेगा। मजदूरों के काम करने की अवधि 12 घंटे कर दी है। मजदूर नेताओं ने आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग भी की। मजदूरों का न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये तय करने का आग्रह किया और बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध किया।
विज्ञापन



रैली के कारण धीमी हुई ट्रैफिक की रफ्तार
शिमला। मजदूरों, किसानों, छात्र संगठनों के इस विरोध प्रदर्शन और रैली के कारण कार्ट रोड पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ गई थी।
रैली में पुलिस के जवानों ने ट्रैफिक को संचालित किया जिससे वाहनों की आवाजाही जारी रही। ओल्ड बस अड्डे से लेकर सब्जी मंडी तक रैली के कारण ट्रैफिक आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। इसके बाद मजदूरों के सब्जी मंडी की ओर चले जाने के बाद शहर के कार्ट रोड पर ट्रैफिक सामान्य हो गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें