वीबी-जी रामजी के तहत रास्ते, पानी के टैंकों के कार्यों में आ रही है दिक्कतें काम करवाने में ग्राम रोजगार सेवकों की बढ़ी मुश्किलें सुमित ठाकुर शिमला। जिले की पंचायतों में वीबी-जी रामजी के तहत होने वाले सैकड़ों कार्य लटकने शुरू हो गए है। राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप में लगातार होने वाले बदलाव और तकनीकी खामियों के चलते मजदूरों को समस्या पेश आ रही है।
काम पर आए मजदूरों की सुबह के समय जहां हाजिरी नहीं लग रही है, वहीं दूसरी ओर इस कार्य को करवाने के लिए ग्राम रोजगार सेवकों की मुश्किलें भी बढ़ गई है। ऐसे में हाजिरी न लग पाने के कारण अब पंचायतों में विकास कार्य ठप होने शुरू हो गए हैं। जिला शिमला में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के तहत इन दिनों गांवों में रास्ते, पानी के टैंक, डंगे, कूहल समेत सैकड़ों काम चल रहे हैं। मजदूर इन कार्यों को करने के लिए साइट पर पहुंच रहे है, लेकिन जब वह एनएमएमएस पर हाजिरी लगा रहे हैं तो उनकी हाजिरी नहीं लग रही है। अब मजदूर हाजिरी से जुड़ी दिक्कतों के कारण काम पर आने से कतरा रहे हैं। इन मजदूरों का कहना है कि जब हाजिरी ही नहीं लगेगी तो उन्हें मजदूरी भी नहीं मिल पाएगी।
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उनका कहना है कि एप में लगातार बदलाव के कारण दिक्कतें पेश आ रही है। दूसरी ओर इन कामों को देखने वाले ग्राम रोजगार सेवकों भी मुश्किलें दोगुनी हो गई है। जिले के विभिन्न विकास खंडों में तैनात ग्राम रोजगार सेवकों के पास छह से सात पंचायतें हैं, ऐसे में उन्हें साइट पर आए एक-एक मजदूरों की हाजिरी लगाना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि अब यह मामला विभाग के पास भी पहुंचा है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में अब मजदूरों को उम्मीद है कि अगर इसका हल निकलेगा तब जाकर भी वह काम पर आएंगे और गांवों में विकास कार्य समय पर पूरे हो पाएंगे। पंचायतीराज विभाग जहां विभिन्न सेवाओं को ऑनलाइन करने जा रहा है लेकिन दूसरी ओर आम मजदूरों की हाजिरी न लग पाना उनकी कार्यप्रणाली पर कहीं न कहीं सवाल भी उठा रहा है।
अधिकारियों को करवा दिया है अवगत : ठाकुर
जिला शिमला ग्राम रोजगार सेवक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि मजदूर एप को लेकर परेशानी बता रहे हैं। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। एक ग्राम रोजगार सेवक के पास कई पंचायतों का दायित्व है। एक ही समय में अलग-अलग पंचायतों में काम कर रहे सैकड़ों मजदूरों की हाजिरी दर्ज करना उन्हें भी आसान नहीं है। तकनीक का उद्देश्य काम आसान करना होना चाहिए लेकिन बार-बार एप में बदलाव होने से फील्ड स्टाफ का काफी समय तकनीकी प्रक्रिया में चला जा रहा है। ऐसे में व्यवस्था को स्थिर करने और हाजिरी दर्ज करने की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाने की मांग अधिकारियों से की गई है।