प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जनविरोधी नीतियां लागू करने और मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को लागू करने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि लगभग 70 प्रतिशत कारखाने इससे श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे और श्रमिकों के हित प्रभावित होंगे। रैली में मजदूरों और किसानों ने केंद्र सरकार से मांग की कि चारों श्रम कानूनों को निरस्त करें, आंगनबाड़ी, आशा और मिड डे मील कर्मियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा दें। मनरेगा को बहाल करने, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई के निर्णय को रद्द करने और शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 को वापस लेने की मांग की गई।
इस अवसर पर आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन की जिला महासचिव खीमी भंडारी, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की जिला कोषाध्यक्ष चंपा देवी, सुन्नी डैम हाइड्रो के अध्यक्ष ओम प्रकाश, प्रेम प्रकाश, दुष्यंत, टेकचंद और दीपक प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रेम लाल मौजूद रहे।