हिमाचल प्रदेश में 11,145 मेगावाट की 171 जल विद्युत परियोजनाएं विद्यमान हैं। यह देश की जल विद्युत ऊर्जा का 23 प्रतिशत हिस्सा है। जल विद्युत ऊर्जा में प्रदेश देश में बड़ी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। निदेशक ऊर्जा हरीकेश मीणा ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय नाहन में आयोजित बैठक में जल विद्युत परियोजनाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 53 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। पांच मेगावाट तक की 95 परियोजनाएं कार्य कर रही हैं। उन्होंने अवगत करवाया कि वर्ष 2023-24 के दौरान 1000 मेगावाट की परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी। इनमें 800 मेगावाट की पार्वती जल विद्युत परियोजना, 150 मेगावाट की टिडोंग, 25 मेगावाट की लुंबाडिग और 24 मेगावाट की सिटीमरंग परियोजनाएं शामिल हैं। वर्ष 2025 तक 2425 मेगावाट की परियोजनाओं को, जबकि 2027 के बाद 5200 मेगावाट की परियोजनाओं को पूरा कर दिया जाएगा। निदेशक ने बताया कि सरकार ने पंप स्टोरेज प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं और सार्वजनिक क्षेत्र सीमित में अभी तक कुल 8500 मेगावाट के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें एसजेवीएनएल से 2570 मेगावाट, एनटीपीसी से 2400 मेगावाट, बीबीएमबी से 1800 मेगावाट और एचपीसीएल से 1730 मेगावाट के प्रस्ताव शामिल हैं। निजी क्षेत्र से लभग 2000 मेगावाट के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और ये प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2022 तक राज्य का विद्युत राजस्व 1302 करोड़ रुपये रहा, जिसे 2027 तक 13,687 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। अगले पांच सालों में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा का भी लक्ष्य रखा गया है।
शौंगटोंग कड़छम परियोजना 2026 तक होगी पूरी
बैठक में 450 मैगावाट की शौंगटोंग कड़छम और काशंग परियोजनाओं की प्रगति पर भी प्रस्तुति दी गई। शौंगटोंग कड़छम परियोजना के निर्माण पर 1700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 44 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। यह परियोजना जुलाई 2026 तक पूरी होगी। इसी प्रकार 130 मेगावाट की काशंग चरण दो व तीन परियोजना का प्राक्कलन 365 करोड़ रुपये का है और अभी तक 349 करोड़ खर्च हो चुके हैं। यह परियोजना भी जून 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगी।