हॉस्टल में सिर्फ 43 महिलाओं के रहने की सुविधा
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दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी में कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए गए एकमात्र सरकारी हॉस्टल में इस समय 29 महिलाएं रह रही हैं। संजौली स्थित इस कामकाजी महिला छात्रावास में अभी 14 सीटें खाली हैं, जबकि 10 नए आवेदन लंबित हैं।
भवन की मरम्मत के कारण फिलहाल किसी भी नई महिला को आवास आवंटित नहीं किया जा रहा है। मरम्मत पूरी होने के बाद ही नए आवेदनों पर प्रवेश दिया जाएगा। जिला शिमला में बाहर से आकर नौकरी करने वाली सैकड़ों महिलाएं हैं, लेकिन उनके लिए सुरक्षित और किफायती आवास के नाम पर संजौली का यही एक हॉस्टल है। इसमें सिर्फ 43 महिलाओं के रहने की क्षमता है। यहां जिले के अलावा विशेष मामलों में प्रदेश के अन्य जिलों से आने वाली निजी क्षेत्र में काम करने वाली युवतियां और कम आय वर्ग की महिलाएं भी आश्रय लेती हैं।
हॉस्टल में कम किराये पर रहने की सुविधा के साथ भोजन, पानी, बिजली और 24 घंटे सुरक्षा की व्यवस्था है। यही कारण है कि यहां रहने के लिए आवेदन अधिक आते हैं, लेकिन क्षमता कम होने के कारण कई महिलाएं इस सुविधा से वंचित रह जाती हैं। शिमला जैसे शहर में, जहां अकेली महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास बड़ी चुनौती है, वहां इस एकमात्र हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
प्रबंधन के अनुसार हॉस्टल भवन काफी पुराना है और इसके कई हिस्सों में मरम्मत की जरूरत है।
भवन के तीन कमरों में भी मरम्मत का काम किया जाना है। इसलिए मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद ही नए प्रवेश दिए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार 14 सीटें खाली होने के बावजूद विभाग जानबूझकर जोखिम नहीं लेना चाहता। मरम्मत के दौरान भवन में काम चलने से रह रही महिलाओं को भी परेशानी हो सकती है। इसलिए पहले भवन को दुरुस्त किया जाएगा और उसके बाद लंबित आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर आवास दिया जाएगा।
संजौली इंजन घर के नगर निगम पार्षद अंकुश वर्मा ने बताया कि समय-समय पर भवन की मरम्मत करवाई जाती है। अब आवश्यकता को देखते हुए दोबारा मरम्मत का प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट प्राप्त होते ही मरम्मत कार्य करवा दिया जाएगा।