हिमाचल को अस्तित्व में आए छह दशक से अधिक का समय हो गया। आज भी ऐसे क्षेत्र हैं, जहां न तो सरकारी योजनाएं दिखती और न ही सरकारी तंत्र। जिला कुल्लू के उप तहसील सैंज की रैला पंचायत में भी ऐसा ही कुछ है।
यहां कुछ गांवों में लोगों को यातायात और स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही। रैला पंचायत के पाशी, खड़ंगचा, थाटीधार, ठाकुराआगे, कुंदर, कुटला क्षेत्र के लोगों को उप तहसील कार्यालय तक पहुंचने के लिए पैदल सफर तय करना पड़ता है।
हाल ही में रैला पंचायत के पाशी गांव की 91 वर्ष की मनहरी देवी व थाटीधार गांव की 89 वर्ष की हरी देवी के अचानक बीमार होने से लोगों को दिक्क्त हो गई। गांव में यातायात और स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा नहीं है।
बीमार महिला की हालत को देख कर ग्रामीणों ने भारी बारिश के बीच कुर्सी पर उठाकर करीब पांच किलोमीटर के खतरनाक रास्ते पर सफर किया। पंचायत के पाशी गांव निवासी भगत राम, चुनी लाल, बुध राम, प्रेम सिंह, यान सिंह, केहर सिंह, भूमि सिंह ने कहा कि उनको सुविधा नहीं मिल रही है।
पंचायत प्रधान खिमदासी तथा उपप्रधान बालमकुंद ने कहा प्रदेश में कई सरकारें आई और गई। लेकिन रैला पंचायत के अति दुर्गम गांव पाशी, खड़ंगचा तथा मझान के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया है।
आलम यह है कि लोगों को खाने-पीने का सामान भी पांच किलोमीटर तक पीठ पर उठाकर पहुंचाना पड़ता है। गांववासियों का कहना है कि सरकार की 102 या 108 एंबुलेंस का लाभ भी नहीं मिल रहा।