जंगलों से चुनकर बाजार में बेच रहे लोग, 30 से 50 रुपये प्रति किलो मिल रहा दाम
औषधीय गुणों से भरपूर मौसमी सब्जी जून से सितंबर तक रहती है उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। राजधानी से सटे क्योंथल क्षेत्र में प्राकृतिक लिंगुड़ सब्जी ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन गई है। यह सब्जी इन दिनों लोगों को स्वाद के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी पहुंचा रही है। ग्रामीण इसे जंगलों और खड्डों से चुनकर बाजार में बेच रहे हैं। यहां इसकी काफी मांग है।
फल एवं सब्जी विक्रेता राजेंद्र सिंह ने बताया कि लिंगुड़ की सब्जी की बहुत मांग है। गांव से आने के बाद यह हाथों-हाथ बिक जाती है। ग्रामीणों को 30 से 50 रुपये प्रति किलो दाम मिल रहे हैं। लिंगुड़ को उगाया नहीं जाता, बल्कि यह विशेष रूप से नमी वाले क्षेत्रों, जंगलों और खड्डों के किनारे खुद उगती है। यह पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक है, जो पौष्टिक होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है। पहाड़ों में लोग दशकों से इस सब्जी का सेवन करते आ रहे हैं। हिमालय की पर्वत शृंखलाओं में विशेषज्ञों ने इसकी असंख्य प्रजातियों का पता लगाया है। प्रारंभिक शोधों से पता चला है कि लिंगुड़ औषधीय गुणों का खजाना है। हिमाचल के अलावा उत्तराखंड में भी इसे लिंगडा के नाम से जाना जाता है। यह सब्जी पहाड़ों में जून से सितंबर तक पाई जाती है।
स्वास्थ्य लाभ और पोषण मूल्य
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर जोशी ने बताया कि लिंगुड़ में विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, पोटैशियम, कॉपर, आयरन, फैटी एसिड, सोडियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, कैरोटीन और अन्य खनिज भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। हिमालयन जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आइएचबीटी), पालमपुर में हुए प्रारंभिक शोधों में यह बात सामने आई है। इसमें आयरन और मैग्नीशियम की प्रचुरता इसे कुपोषण से निपटने का एक अच्छा स्रोत बनाती है। लिंगुड़ हृदय रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें मधुमेह सहित कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है।