हिमाचल के जिला कांगड़ा के मनेई गांव में शादी का अनूठा मंडप सजा। गाजे-बाजे के साथ आई बारात की खूब आवभगत हुई। शहनाई बजी और मंत्रोच्चारण के साथ सात फेरे हुए। खास बात यह कि दुल्हन का कन्यादान पिता की जगह ससुर ने किया।
दरअसल, पुनर्विवाह करा एक ससुर ने अपनी विधवा बहू को उसके नए जीवन साथी के साथ विदा किया। बहू का कन्यादान और विदाई कर गिरधारी लाल ने एक मिसाल पेश की है। पूरे इलाके में इसकी चर्चा है।
मार्च 2014 में मनेई के पूर्व प्रधान गिरधारी लाल के बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस समय उनकी बहू के हाथ पीले हुए करीब तीन साल ही हुए थे। उनका बेटा पत्नी और दो साल की बेटी पीछे छोड़ गया था। बेटे की मौत से टूट चुके पिता ने अपने दुख से ज्यादा बहू के भविष्य को तरजीह देने की ठानी।
तीन साल से बहू के लिए वर तलाश रहे थे
उन्होंने मन बना लिया कि वे बहू का पुनर्विवाह करेंगे, इसके लिए चाहे उन्हें समाज का विरोध भी क्यों न झेलना पड़े। अपनी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए गिरधारी लाल पिछले तीन साल से बहू के लिए अच्छे वर की तलाश में जुटे थे।
आखिरकार पठानकोट के साथ लगते गांव उच्चा थड़ा में उन्हें बेटी समान बहू के लिए प्रदीप कुमार के रूप में वर मिल गया।
लड़के के घरवालों के साथ गिरधारी लाल की बहू ने भी यह रिश्ता मंजूर कर लिया। पठानकोट से बारात गाजे-बाजे के साथ मनेई गांव पहुंची और गिरधारी लाल ने पिता का फर्ज निभाकर रीति-रिवाज के साथ अपनी बहू का कन्यादान कर उसे विदा किया।
एक माह के बाद मां के साथ रहेगी बेटी
बड़ी संख्या में इलाके के लोगों ने शादी समारोह में आकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया। गिरधारी लाल ने बताया कि अपनी बहू का दोबारा घर बसाने के लिए उनके रास्ते में कई कठिनाइयां आईं।
लेकिन बेटा खोने के बाद उन्होंने बहू को अपनी बेटी मानकर उसे उसकी खुशियां वापस देने का बीड़ा उठाया था जिसमें वह कामयाब रहे हैं।
पांच साल की बच्ची फिलहाल एक माह के लिए दादा गिरधारी लाल के पास ही रहेगी। इसके बाद वह अपनी मां के साथ नए घर पठानकोट में ही रहेगी। इस बारे में भी दोनों परिवारों के बीच सहमति बन चुकी है।