हिमाचल प्रदेश सरकार आल इंडिया सर्विस के अफसरों की पोस्टिंग, तबादलों के लिए सर्विस बोर्ड गठित करने से पीछे हट रही है। इससे साफ है कि सरकार अभी भी अफसरों की नकेल को अपने हाथों से छोड़ने को तैयार नहीं है।
ऐसे में जहां आईएएस कॉडर के अफसरों पर ट्रांसफर की तलवार लटकी रहती है तो वहीं कार्यशैली भी प्रभावित होने का अंदेशा रहता है।
बोर्ड गठित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी, 2014 की डेडलाइन दी थी जो कि बीते करीब चार महीने से खत्म हो गई है।
ये थे देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सब राज्यों को यह निर्देश 31 अक्तूबर, 2013 को दिया था। इस फैसले की पालना करते हुए हरियाणा, महाराष्ट्र, पुडुचेरी समेत कई अन्य राज्य सरकारों ने सर्विस बोर्ड गठित कर दिए हैं मगर हिमाचल प्रदेश सरकार ने अब तक यह बोर्ड गठित नहीं किया है।
सूत्रों के अनुसार यह मामला दो बार मंत्रिमंडल की बैठक में भी पहुंचा मगर दोनों बार कुछ टिप्पणी के साथ मामला लटका दिया। लटकाने के पीछे सरकार की मंशा लगती है कि अफसरों के तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप होता रहे।
सर्विस बोर्ड गठित होने के बाद हालांकि राजनीतिक हस्तक्षेप फिर भी हो सकता है मगर बोर्ड की सिफारिश नामंजूर करने के लिए कारण बताना होगा। बोर्ड के अध्यक्ष राज्य के मुख्य सचिव होते हैं।
सरकार लटका रही है मामला
सूत्रों ने मुताबिक जब पहली बार यह मामला हिमाचल प्रदेश के मंत्रिमंडल के सामने पहुंचा तो एजेंडे पर डिस्कस के दौरान मंत्रिमंडल ने अनौपचारिक तौर पर पूछा कि किस राज्य ने बोर्ड गठित कर दिया है?
गठित करने के बाद इसका कामकाज क्या होगा? जब कार्मिक विभाग ने अन्य राज्यों से जानकारी मांगी तो पता चला कि हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार ने सर्विस बोर्ड गठित कर दिया है।
अन्य राज्यों से जानकारी मंगाई जा रही है। इस जानकारी के साथ जब यह मामला मंत्रिमंडल की अगली बैठक में रखा तो मंत्रिमंडल ने फिर पूरी जानकारी मांग ली।
अधिकारी के तबादले को देना होगा स्पष्टीकरण
आल इंडिया सर्विस अफसरों के अनुशासनात्मक कार्रवाई, सर्विस मामलों खासकर पोस्टिंग और तबादलों के लिए यह सर्विस बोर्ड राज्य सरकार को सलाह देगा और गाइड करेगा। यद्यपि बोर्ड के सुझावों को सरकार ओवररूल कर सकती है मगर ऐसा करने के लिए लिखित कारण दर्ज करने होंगे।
इससे पारदर्शिता, जवाबदेही भी आएगी। आईएएस के लिए बोर्ड में मुख्य सचिव चेयरमैन होंगे, प्रधान सचिव या सचिव कार्मिक सदस्य सचिव होंगे और प्रधान सचिव राजस्व या सीनियर मोस्ट अफसर बोर्ड के सदस्य होंगे।
हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव पी. मित्रा ने कहा कि फिलहाल सर्विस बोर्ड गठित नहीं हुआ है। मंत्रिमंडल में भी मामला गया था। बोर्ड गठित किया जा रहा है।