हिमाचल में पिछले 10 वर्षों में तेंदुए 32 इंसानों की जान ले चुके हैं और 365 से अधिक हमले कर चुके हैं। इसी चिंता को लेकर वन विभाग का वन्य प्राणी विंग तेंदुओं के स्वभाव पर अध्ययन कर रहा है कि आखिर हिमाचल में तेंदुए नरभक्षी क्यों हो रहे हैं।
जंगलों के बजाय रिहाइश में क्यों आ रहे हैं, क्या इनके भोजन की आवश्यकता में परिवर्तन या फिर इंसानी छेड़छाड़ का नतीजा तो नहीं है। इसके पीछे की परिस्थितियां क्या हैं, कुल 20 सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
पिछले 10 वर्षों की घटनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए बंगलूरु की वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन सोसायटी के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
हमले वाली जगह की जीपीएस लोकेशन भी रिकार्ड की जा रही है। ये सोसायटी देश और विदेशों में तेंदुओं और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव पर कई अध्ययन कार्य कर चुकी है।