इस अनोखी परंपरा के बावजूद मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी हरिनंद बताते हैं कि दंत कथा के अनुसार जब भगवान शिव और देवी पार्वती ने अपने दोनों बेटों की परीक्षा ली और उन्हें पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने को कहा तो गणेश ने शिव और पार्वती की परिक्रमा कर परीक्षा जीत ली। कार्तिक पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने निकल पड़े।
कार्तिक लौटे तब तक गणेश का विवाह हो गया। इसके बाद कार्तिक ने विवाह न करने का प्रण लिया। आज भी श्री श्राईकोटी के द्वार पर गणेश अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं। कार्तिक के शादी न करने के प्रण से देवी पार्वती बहुत दुखी हो गईं और कहा कि जो भी पति-पत्नी एक साथ यहां उनके दर्शन करेगा उस दंपती को बिछुड़ने का दंड मिलेगा।
पुजारी कहते हैं कि यही कारण है कि आज भी यहां पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी का दावा है कि देवी उन लोगों को भी संतान देती है, जिनकी हर जगह से उम्मीद टूट चुकी होती है। देवी ने ऐसे लोगों को भी संतान का सुख दिया है जिनको चिकित्सकों ने भी मना कर दिया था।