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Himachal: देवभूमि में अकेले मानसून ने ही नहीं मचाया तबाही का तांडव, तुर्किये-पाकिस्तान से आया पश्चिमी विक्षोभ

Tue, 15 Aug 2023 12:02 PM IST
शाहरुख खान सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश में तुर्किये और पाकिस्तान से आए पश्चिमी विक्षोभ ने मानसून से जुगलबंदी कर तबाही मचाई। अंध महासागर से उठी आर्द्र हवाओं ने कैस्पियन, भूमध्य और काला सागर से नमी जोड़ी। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से मानसून भी इस बार फुट हिल तक पहुंच गया।
 
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कार पर गिरा पेड़। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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यूरोपीय देशों को पार कर तुर्की, ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिमाचल प्रदेश पहुंचे पश्चिमी विक्षोभ ने मानसून से जुगलबंदी कर यहां तबाही का तांडव रचा है। हिमाचल में अकेले मानसून ने ही यह हाहाकार नहीं मचाया है, बल्कि पश्चिम से विक्षोभ की अतिसक्रियता से देवभूमि दोहरी घिर गई। यह विक्षोभ अंध महासागर से उठता है।
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उत्तरी अंध महासागर से उठी आर्द्र तूफानी हवाओं ने अपने साथ भूमध्य, कैस्पियन और कालासागर से नमी जोड़ी। दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाला मानसून इस बार हिमालय के फुटहिल तक पहुंच गया। अमूमन ऐसा नहीं होता है। तबाही के इस मंजर में सबके जहन में एक ही सवाल है कि हिमाचल प्रदेश में इस बार इतनी भारी तबाही क्यों हो रही है? 
इस बार मानसून 24 जून को हिमाचल प्रदेश पहुंचा, पर उससे पहले ही पश्चिमी विक्षोभ खूब बारिश कर रहा था। मई से ही भारी बारिश का दौर शुरू हो गया था। इसका कारक पश्चिमी विक्षोभ ही रहा है। पिछले कई वर्षों से मानसून से पूर्व ऐसी बारिश कभी नहीं हुई। 
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इसी से अगले संकेत भी मिल गए थे। पश्चिमी विक्षोभ के यही तेवर मानसून की इस चरम अवस्था में भी बने हुए हैं। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का जैसे डबल इंजन काम रहा है।
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मानसून पूरे आवेश में हिमालयीय क्षेत्र में फुटहिल तक पहुंच गया है, जो आमतौर पर मैदानी क्षेत्रों तक ही पहुंच पाता था। पश्चिमी विक्षोभ ने इसे दोहरी ताकत दे दी है। मानसून के लिए इस बार करीब एक किलोमीटर का लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। यह भी सामान्य से ज्यादा है। प्रदेश में सामान्य से अत्यधिक बारिश का यही कारण है। भारी बारिश के ग्लोबल कारण भी हैं। फिर भी इस तरह की स्थिति का बनना अध्ययन का विषय है। -सुरेंद्र पाल निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला
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