समुद्रतल से 5458 मीटर ऊंचे अली रत्नी टिब्बा से पश्चिम बंगाल के चार ट्रैकर लापता हो गए हैं। उनकी तलाश व बचाव के लिए तीन अगल-अलग टीमें रवाना हो गई है। जो देर रात तक अली रत्नी टिब्बा पहुंचगे। इसकी सूचना गुरुवार रात करीब दस बजे जिला प्रशासन व जरी पुलिस को मिली। इसके बाद मणिकर्ण घाटी से छापेराम नेगी रेस्क्यू दल के पांच लोग रवाना हो गए हैं। जबकि शुक्रवार सुबह मनाली के अटल बिहारी बाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान से 15 लोगों का दल भी रवाना हुआ है। जबकि मलाणा से तीसरा दल दो लोगों का निकला है, जिसमें ट्रैकर दल का रसोइया व एक स्थानीय युवक गया है। लेकिन अभी तक लापता ट्रैकरों का कोई भी अतापता नहीं लग पाया है।
जानकारी के अनुसार 22 अगस्त को मलाणा से सात लोगों को एक दल ट्रैकिंग व क्लाइमिंग करने के लिए अली रत्नी टिब्बा के लिए निकला था। इन लोगों ने अली रत्नी टिब्बा से करीब पांच घंटे के सफर पर बैस कैंप बनाया गया। सात अगस्त को सुबह करीब पांच बजे 43 वर्षीय अभिजीत बानिक, 43 वर्षीय चिन्मय मंडल, 37 वर्षीयदिबाश दास तथा 31वर्षीय बिनॉय दास क्लामिंग करने के लिए रवाना हुए थे। जबकि तीन लोग बैस कैंप में रूके हुए थे। इसमें 33 वर्षीय मनोज नाथ, 50 वर्षीय लाकपा शेरपा तथा 30 वर्षीय आराग्य मंडल शामिल थे। मनोज नाथ और आराग्य मंडल ने बताया कि चार सदस्य दल को इसी दिन शाम को वापिस बैस कैंप आना था, लेकिन वह नहीं आए और वह अगले दिन आठ अगस्त तक 12 बजे तक नहीं आए।
इसके बाद रसोइया लाकपा शेरपा रत्नी टिब्बा पहुंचे और कोई सुराग नहीं मिला। दो घंटा रूकने के बाद वह वापिस बैस कैंप आया और तीन लोग मदद के लिए मलाणा गांव पहुंचे। जहां स्नो बाइट कैफे पहुंचे और यहां कैफे संचालक पुणे राम को पूरी कहानी बता कर इसकी सूचना जिला आपदा प्रबंधक व जरी पुलिस को दी गई। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि लापता क्लाइमर व ट्रैकरों की तलाश के लिए 20 सदस्य टीमों को रवाना कर दिया है। कहा कि क्लाइमिंग के लिए दल ने इंडियन माउंट फेडरेशन (आईएमएफ) से ली गई थी। लेकिन स्थानीय प्रशासन को उनके क्लाइमिंग स्थल पर आने की कोई सूचना नहीं थी।