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Himachal: नेता बोले-कांगड़ा में कमजोर संगठन, शिमला में अति उत्साह से हुई कांग्रेस की लोकसभा चुनाव में हार

Wed, 17 Jul 2024 11:05 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

संसदीय क्षेत्रों के कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन मेंं इस बाबत बेबाकी से फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा
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लोकसभा चुनाव में हार के कारणों पर पार्टी मुख्यालय शिमला में चर्चा की। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव में कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में कमजोर संगठन और शिमला में अति उत्साह भी कांग्रेस प्रत्याशियों की हार का बड़ा कारण रहा। दोनों संसदीय क्षेत्रों के कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन मेंं इस बाबत बेबाकी से फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा।  लोस चुनाव की जगह विस उपचुनाव पर अधिक फोकस होने को भी समीकरण बदलने का एक कारण बताया गया। नेताओं ने कहा कि आनंद शर्मा के प्रत्याशी बनने से कांगड़ा-चंबा में चुनावी माहौल तो बना लेकिन इसे वोट में तबदील नहीं किया जा सका।

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कुछ क्षेत्रों में बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता निष्क्रिय रहे। शिमला जिले को कांग्रेस का गढ़ समझने के भ्रम में मतदाताओं के घर-द्वार से कार्यकर्ताओं ने दूरी बनाए रखी। कांग्रेस की हार के कारण तलाशने आई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य रजनी पाटिल और पीएल पुनिया ने दूसरे दिन भी विभिन्न नेताओं से फीडबैक लिया।  मंगलवार को कांगड़ा और शिमला संसदीय क्षेत्र के नेताओं से चर्चा की गई। कृषि मंत्री चंद्र कुमार, भवानी पठानिया, किशोरी लाल, मलेंद्र राजन, आशीष बुटेल, केवल सिंह पठानिया, देवेंद्र जग्गी, संजय चौहान, आशा कुमारी, अजय महाजन, विनोद सुल्तानपुरी, महेश्वर चौहान, हरीश जनारथा, रामकुमार चौधरी, मोहनलाल ब्राक्टा सहित कई नेताओं ने अपनी बात रखी।

कमेटी को बताया गया कि कांग्रेस के गारंटी पत्र में किए गए जातीय जनगणना के जिक्र के चलते कांगड़ा संसदीय सीट पर सवर्ण वर्ग के मतदाताओं ने पार्टी से दूरी बनाई, साथ लगते राज्यों उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी इसका असर रहा। जिन क्षेत्रों में सवर्ण वर्ग के मतदाता कम थे, वहां अन्य समुदाय के मतदाताओं ने कांग्रेस का साथ दिया। कुछ नेताओं ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आंनद शर्मा को प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर पूर्व में किसी से चर्चा नहीं की गई। नाम घोषित होने के बाद उन्हें पता चला। देरी से प्रत्याशी घोषित होना भी हार का एक कारण बताया गया। शिमला संसदीय सीट के नेताओं ने बताया कि पीएम मोदी की नाहन रैली के बाद शिमला में भाजपा के पक्ष में माहौल बना। संसदीय क्षेत्र से पांच कैबिनेट मंत्री, तीन मुख्य संसदीय सचिव, विधानसभा उपाध्यक्ष होने के चलते कार्यकर्ता इसी भ्रम में रहे कि यहां पार्टी की स्थिति मजबूत है। इससे शिमला सीट भी भाजपा की झोली में चली गई।  
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आनंद दिल्ली में रखेंगे कमेटी के समक्ष पक्ष
कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा दिल्ली में ही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। आनंद शर्मा इन दिनों देश से बाहर गए हुए हैं।

जल्द हाईकमान को सौंपी जाएगी रिपोर्ट : रजनी
रजनी पाटिल और पीएल पुनिया ने बताया कि मंडी और हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के नेताओं ने सरकार और संगठन में समन्वय नहीं होने की बात कही है। कांग्रेस प्रत्याशियों का देरी से नाम तय होना एक बड़ा कारण अधिकांश नेताओं ने बताया है। भाजपा ने दो से तीन चरण का चुनाव प्रचार भी कर लिया था, इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी तय हुए। रजनी पाटिल ने कहा कि बेलगाम अफसरशाही को लेकर वो अभी कुछ नहीं कहेंगी। पुनिया ने कहा कि हार के कारणों को जानने के लिए ब्लॉक अध्यक्षों से भी बात की गई है। सारी रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंपी जाएगी। 
 
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बाहर से प्रत्याशी होना कोई बड़ी बात नहीं : आशा
पूर्व मंत्री आशा कुमारी ने कहा कि कांग्रेस ने कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से मजबूत प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा था। संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी का न होना कोई बड़ी बात नहीं है। मोदी फैक्टर ने चुनाव में बहुत अधिक काम नहीं किया। राम मंदिर जरूर एक कारण रहा लेकिन जिस प्रकार से मंदिर से जुड़े तथ्य अब बाहर आ रहे हैं, ये अगर पहले सामने आते तो तस्वीर कुछ और हो सकती थी। बारिश अगर पहले हो जाती तो सब कुछ जनता के सामने आ जाना था। भाजपा ने धनबल से किया प्रचार  मुख्य संसदीय सचिव आशीष बुटेल ने कहा कि हार के लिए टिकट में देरी भी एक कारण रहा है। भाजपा ने धनबल से भी प्रचार किया। आनंद शर्मा बड़ा चेहरा थे। केंद्रीय मंत्री रहते हुए आनंद शर्मा ने कांगड़ा के लिए बहुत कार्य किए। 
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