राजधानी में 24 घंटे पानी देने की योजना पर उठे सवालों पर पेयजल कंपनी ने दी सफाई, लगा चुके हैं चार करोड़ की पेनल्टी
कंपनी का तर्क, एनओसी न मिलने से पेयजल योजना के काम में हुई देरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की योजना पर उठ रहे सवालों पर अब पेयजल कंपनी शिमला जल प्रबंधन निगम ने भी अपनी सफाई दी है। कंपनी ने काम में देरी को लेकर कई तर्क दिए हैं। दावा है कि टैंकों के निर्माण में देरी का बड़ा कारण शिमला का भूकंप जोन बदलना रहा है।
यही नहीं, वार्डाें में काम शुरू करने के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी लेने के लिए भी समय लगा है। इसके चलते काम में कुछ देरी हुई है। कंपनी के एजीएम बसंत सिंह राठौर ने माना कि शहर में नए टैंकों के निर्माण समेत पेयजल लाइनों के काम में देरी हुई है। हालांकि, इसके पीछे कई हैं। कहा कि केंद्र सरकार ने भूकंप जोन में बदलाव किया है। शिमला शहर को जोन चार से जोन छह में शामिल किया गया है। 3 मई 2026 को इसकी अधिसूचना हुई जिसके बाद टैंकों के डिजाइन में बदलाव करना पड़ा। कहा कि ठेकेदार कंपनी पर काम में देरी के लिए पहले ही चार करोड़ की पेनल्टी लगा चुके हैं। करीब चार करोड़ रुपये का भुगतान भी रोका है। यदि और पेनल्टी लगाते तो योजना विवाद में घिर सकती थी। ठेकेदार कंपनी इसे चुनौती दे सकती थी। कंपनी के अनुसार कई जगह साइट क्लीयरेंस और जरूरी अनुमति न मिलने के कारण काम शुरू करने में देरी हुई। विभिन्न विभागों की जमीन पर काम शुरू करने के लिए एनओसी लेने की औपचारिकताएं पूरी करने में समय लगा। एनएच, वन, सीपीडब्ल्यूडी, नगर निगम शिमला से जरूरी एनओसी ली गई। कई जगह स्थानीय लोगों के काम पर आपत्ति जताने के कारण भी देरी हुई। स्वतंत्र मूल्यांकन करने वाली एजेंसी की नियुक्ति में देरी से भी काम लटका। एफआरए की मंजूरी लेना भी जरूरी था। एजीएम ने कहा कि अब योजना के काम में तेजी आ रही है। जल्द इसे पूरा किया जाएगा।