शिमला की तर्ज पर सूबे के शहरी निकायों में जल प्रबंधन कंपनियां बनाने को लेकर शहरी विकास विभाग ने कमर कस ली है। धर्मशाला में शहरी विकास विभाग ने कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव सहित विश्व बैंक और शिमला जल प्रबंधन निगम, स्मार्ट सिटी परियोजना के अलावा नगर निगम धर्मशाला, नगर परिषद मंडी, नूरपुर, कांगड़ा, नेरचौक के अधिकारी और प्रतिनिधि भाग लेंगे।
पर्यटन की दृष्टि से शहरों को विकसित किया जा रहा है। इसलिए वहां पर जल प्रबंधन और सीवरेज व्यवस्था बेहतर करने पर काम किया जाएगा। शिमला की तर्ज तक जल प्रबंधन कंपनियों के गठन से सैकड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। जल प्रबंधन कंपनियों का गठन आगामी 30 साल की जनसंख्या को ध्यान में रख कर किया जाएगा। जल प्रबंधन कंपनियों के दायरे में शहरी निकायों के साथ लगते कुछ गांवों का भी चयन करने का प्रस्ताव है, ताकि वहां पर भी पानी का प्रबंधन और सीवरेज योजना विकसित की जा सके।
शहरी निकायों में मिलेगी पेयजल की बेहतर सुविधा : सरवीण
शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार शहरी निकायों में पेयजल और सीवरेज सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए वर्ल्ड बैंक के साथ मिल कर कार्य करेगी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक ने 986 करोड़ का शिमला वाटर सप्लाई और सीवरेज प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान की है और प्रोजेक्ट आरंभ करने के लिए पहली किस्त के तौर पर 292 करोड़ रुपये जारी किए हैं। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड शिमला की तर्ज पर ही अन्य शहरी निकायों में भी पेयजल एवं सीवरेज सिस्टम प्रोजेक्ट को आरंभ किया जाएगा।
शहरी निकाय 31 अगस्त से पहले भेजें प्रस्ताव: सक्सेना
शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि शहरी निकायों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों के आपसी सहयोग से ही इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सकता है तथा इस बारे में विस्तार से चर्चा कर 31 अगस्त से पहले प्रस्ताव पारित कर भेजना सुनिश्चित करें। इससे पहले प्रोजेक्ट को लेकर वर्ल्ड बैंक की प्रतिनिधि स्मिता ने भी विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।