अभी तक ब्यास में बाढ़ आने पर जलस्तर की अधिकतम सीमा लगभग 2500 क्यूमेक्स रिकार्ड थी। सोमवार को ब्यास में पानी की धारा का प्रवाह 3200 क्यूमेक्स तक पहुंच गया। उधर, परियोजना ने नदी में पानी के बहाव को देखते हुए डैम के चार गेट 30 मीटर तक खोल दिए हैं।
इससे मंडी तक निचले क्षेत्र बाढ़ की चपेट में हैं। बिजली उत्पादन के लिए डैम में सिल्ट की मात्रा 2000 पीपीएम से अधिक नहीं होनी चाहिए। लारजी जल विद्युत परियोजना के सीनियर एक्सईएन सुनील कुमार ने कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, विद्युत उत्पादन मुश्किल है।
जलस्तर बढ़ने के कारण कई जगह एनएच पर ब्यास का पानी पहुंच गया है। दावड़ा के पास नदी का पानी सड़क पर है। इससे वाहनों की आवाजाही बंद है।रविवार को कुछ देर के लिए यातायात बहाल किया था, लेकिन रविवार सायं जलस्तर बढ़ने के बाद शाम छह बजे से यातायात बंद है।
भारी बारिश के कारण पौंग बांध का जलस्तर बढ़ गया है। सोमवार को 1390 फीट पर जलस्तर को खतरे के निशान आंका गया है। ऐसे में किसी भी समय पौंग बांध का पानी छोड़ा जा सकता है।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने जिलाधीश कांगड़ा, एसडीएम देहरागोपीपुर, फतेहपुर, इंदौरा सहित शाहनहर के अधिकारियों को सूचित कर हाई अलर्ट जारी किया है।
सोमवार शाम तक डैम का जलस्तर 1385.68 फीट तक पहुंच चुका था। 1390 फीट खतरे का निशान चिह्नित किया गया है। सोमवार को डैम में 1,69,544 क्यूसिक पानी की आवक हो रही है, जबकि 12,478 क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है।
उधर, एसडीएम फतेहपुर बलवान चंद ने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की सूचना मिली है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे बांध क्षेत्र के आसपास न जाएं।