हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश से नाले में अचानक जलस्तर बढ़ने से दो कारें मलबे में दब गईं। कई घरों में भी पानी भर गया। फसलों को भी नुकसान हुआ है। चंबा-पठानकोट नेशनल हाईवे सहित जिले के 23 मार्गों पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। मूसलाधार बारिश के बाद पल्यूर पंचायत के दुहाड़ा वार्ड में लोगों के घरों और गोशाला में पानी घुस गया। सफी मोहम्मद पुत्र जान मोहम्मद निवासी बैरी और देवराज पुत्र देसराज निवासी गणजी की कारें मलबे में दब गईं।
इसके अलावा कैहला नाले से होकर बैली-जम्मुहार के लिए जाने वाली पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं, दूसरी ओर ग्राम पंचायत कुनेड़ में लिल्ह नाले का जलस्तर बढ़ने से डलहोथा में पवन कुमार की गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई। किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सोमवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश से भरमौर-पठानकोट एनएच सहित 25 सड़कों पर यातायात ठप हो गया। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोगों को पैदल या फिर वाहनों को हायर कर अपने गंतव्यों तक पहुंचना पड़ा। सूचना मिलने के बाद एनएच और लोनिवि की मशीनरी के साथ लेबर यातायात को बहार करने के लिए जुट गए। वहीं, बारिश से मक्की, जौ और आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। जबकि, बागवानों के लिए यह बारिश वरदान से कम नहीं है। एनएच मंडल चंबा के सहायक अभियंता कनव बड़ोत्रा ने बताया कि एनएच कलसुई, धरवाला और केहरू के पास भूस्खलन के चलते बंद हो गया था। उसे दोपहर 11 बजे तक बहाल करवा दिया गया है। उपायुक्त डीसी राणा ने बताया कि पल्यूर और कनेड़ पंचायत में भारी बारिश के चलते हुए नुकसान का जायजा लेने संबंधी विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नुकसान की रिपोर्ट आने पर प्रभावितों को यथासंभव सहायता राशि दी जाएगी।
भावला में बारिश से नाले बन गए खेत
ग्राम पंचायत भावला के नैला गांव में सोमवार रात को भारी बारिश ने काफी तबाही मचाई। मूसलाधार बारिश से नैला नाले का जलस्तर एकाएक बढ़ गया। नाले का पानी खेतों में बहने लगा जिससे, खेत भी नाले में तब्दील हो गए। किसानों ने खेतों में मक्की की फसल की बिजाई की तैयारी कर रखी थी लेकिन बारिश ने किसानों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। खेतों में जहां नालियां बन गईं तो वहीं पत्थरों की भी भरमार हो गई। अब किसानों को खेतों में मक्की की बिजाई करने से पहले दुरुस्त करना होगा। नैला गांव के लोग खेतों को हुए नुकसान को लेकर काफी परेशान हैं।
लोगों ने नुकसान की एवज में प्रशासन से राहत राशि जारी करने की मांग की है। इसको लेकर प्रभावित लोगों ने पंचायत प्रतिनिधियों को भी अवगत करवा दिया है। मक्की की फसल की बिजाई इसी महीने होती है। ऐसे में अगर लोग समय पर मक्की की बिजाई नहीं कर पाए तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि गांव के ज्यादातर लोग फसलों की बिजाई से होने वाली कमाई से ही अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। एसडीएम तीसा मनीष चौधरी ने बताया कि संबंधित पटवारी को मौके पर भेजकर नुकसान की रिपोर्ट बनाई जाएगी। उसके आधार पर ही प्रभावितों को सहायता राशि दी जाएगी।