राजधानी शिमला के मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट के पास ग्राम पंचायत चनोग के कहलोग गांव में मोबाइल फोन का एक बटन क्लिक करते ही सिंचाई का पानी 220 मीटर ऊपर लिफ्ट होना शुरू हो जाता है।
सोलर पैनल के साथ ही एक चिप जोड़ी गई है, जिसका संबंध शक्ति मोबाइल ऐप से है। इसी चिप से मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित शक्ति पंप से भी इस सोलर स्कीम की निगरानी की जाती है।
अगर खुद सोलर पंप को ऑन न कर पाएं तो ये मध्य प्रदेश के शक्ति पंप पर टोल फ्री नंबर पर सूचना देने के बाद भी ऑन हो जाता है। इस योजना के लिए शक्ति पंप के साथ ही हिमाचल के कृषि महकमे का समझौता हुआ है।
कहलोग में सामुदायिक सिंचाई योजना महज 13.73 लाख रुपये की लागत से बनी है और इसका 100 फीसदी खर्च कृषि महकमे ने ही उठाया है। सामान्य योजना में इससे चार-पांच गुणा तक खर्च आ सकता है। कहलोग में 30 सोलर पैनल लगे हैं।
इनसे 7500 वाट बिजली पैदा होती है जो 220 मीटर ऊपर तक पानी खींच रही है। जहां नीचे जाबल का खेत जगह से पानी लिफ्ट हो रहा है, वहां पानी भी बहुत कम है। इसे पहले दो छोटे-छोटे स्रोतों से एकत्र कर एक टैंक में स्टोर किया जा रहा है।
इस निचले टैंक से पानी 220 मीटर ऊपर दूसरे टैंक में जा रहा है। वहां से नीचे गांव में करीब चार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई को छह चैंबर बनाए गए हैं। इनसे कहां पानी छोड़ना है कहां नहीं, इसका भी चैंबरों में ही नियंत्रण है।
सोलर पैनल से दोहरा काम होगा। एक सिंचाई को पानी लिफ्ट होगा तो दूसरा गांव के लिए बिजली भी पैदा होगी। बिजली पैदा करने के लिए अलग से बैटरी लगवाई जा रही है।
कृषि उपनिदेशक शिमला डॉ. चंद्रप्रकाश वर्मा ने बताया कि इस योजना को उप मंडलीय भू संरक्षण अधिकारी देवी चंद कश्यप, डिविजनल इंजीनियर अश्वनी कुमार भारद्वाज, भू संरक्षण मंडल शिमला के अनुभाग अधिकारी हेमराज गांधी आदि की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।
वे खुद और कृषि विभाग के निदेशक डॉ. देसराज वर्मा भी इस योजना का विजिट कर चुके हैं।कहलोग गांव के श्रीराम चंद, जगदीश चंद और खेम चंद बताते हैं कि उनके गांव में परंपरागत फसलें ही होती हैं।
इनसे अच्छी आमदनी नहीं हो पाती थी, जिससे खेतीबाड़ी लगभग उजाड़ है। अब वे नकदी फसलें उगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कृषि महकमे का इस योजना के लिए धन्यवाद किया है।
सिंचाई के साथ घरेलू इस्तेमाल को बिजली भी पैदा करेंगे : बाल्दी
कहलोग गांव की तरह ही सरकार पूरे हिमाचल में इस तरह की योजनाएं बनाना चाहती है। एक तो इनसे बिजली का खर्च नहीं आएगा, दूसरा खेतों की सिंचाई के अलावा संबंधित गांवों के लिए बिजली भी तैयार होगी। इससे बिजली की बचत भी होगी।