गंभीर जलसंकट में हैंडपंप ने इलाके को पीने लायक पानी दिया।आज भी लोग इस हैंडपंप को राहत के तौर पर ही देखते हैं। रानीताल क्षेत्र में कुछ वर्ष पूर्व पानी की किल्लत चल रही थी। लोग बाल्टियां लेकर दर-दर भटकते थे।
खासकर किरायेदारों को पानी नहीं मिल पाता था। हैंडपंप लगाने के लिए लोगों ने दफ्तरों के कई चक्कर काटे। आखिरकार छह महीने की मेहनत के बाद हैंडपंप लग पाया।
गंभीर जल संकट से जूझ रहे शिमला में कुछ हालात सुधरने लगे हैं। समस्या से निजात दिलाने के लिए अब सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जा रहा है। 19 टैंकरों के जरिये सतलुज से करीब पांच लाख लीटर पानी रोज गुम्मा टैंक में डाला जा रहा है।
गुम्मा से यह पानी शिमला के लिए सप्लाई हो रहा है। बारिश के बाद नए ट्यूबवेल और छोटे पंप चालू होने से सप्लाई 37.63 एमएलडी तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। नगर निगम के इस दावे के बावजूद शिमला के कई इलाकों को पानी नहीं मिल रहा।
वहीं, पिछले दो दिन में कसुम्पटी, विकासनगर, पंथाघाटी और सील्ड रोड पर पानी के लिए प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
इसी बीच, पुलिस ने लोगों को राहत देने के लिए शिमला शहर में पीने के पानी की करीब 1400 बोतलें बांटीं। शिमला के अलावा चंबा सिरमौर, कुल्लू, कांगड़ा, बिलासपुर के कई इलाकों में लोगों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।