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शिमला में पेयजल संकट, पानी खरीदने को मजबूर हुए लोग

Thu, 11 Feb 2016 09:49 AM IST
विजय खाची/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी शिमला के लिए जैसे ही अश्वनी पेयजल परियोजना से दूषित पानी की आपूर्ति बंद की गई शहर और साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। डेढ़ माह से पीने के पानी का यहां घोर जलसंकट चल रहा है। मैहली और उसके आसपास के क्षेत्र के लोगों को पैसा खर्च कर पीने के लिए टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। एमसी एरिया के तहत जो क्षेत्र आते हैं सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति को तरजीह दी जा रही है।
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इस पूरे ग्रामीण क्षेत्र में जल एवं सिंचाई विभाग के कर्मचारी पेयजल आपूर्ति करते हैं। इस क्षेत्र में पहले अश्वनी जल परियोजना से पेयजल आपूर्ति होती थी लेकिन जब से गिरि जल परियोजना से इस क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति हो रही है उस समय से इस क्षेत्र में हफ्ते बाद पीने के पानी की सप्लाई आ रही है वो भी सिर्फ एक घंटे। आईपीएच विभाग के तहत इस क्षेत्र के मैहली, शकराड़ा, शिलड़ी, गोड़पा, कुफर, रसाणा, जाड़फ और चैली के आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। लोगों का कहना है कि नगर प्रशासन को इस समस्या का हल जल्द करवाना चाहिए।

डेढ़ माह से नहीं टपका नलके से पानी
मैहली की स्थानीय महिलाओं रचना वर्मा, रेखा वर्मा, सुनीता धनी, भारती सूद और भावना ने कहा कि पहले भी पानी की दिक्कत होती थी लेकिन इतनी नहीं। अब तो डेढ़ माह से नलके सूखे पड़े हैं। पानी के टैंकर मंगवाकर परिवार के लिए खाना बनाना पड़ रहा है। डिस्पोजेबल पलेटों में खाना खाना पड़ रहा है ताकि पानी का कम खर्चा हो। परिवार की सारी कमाई पानी के टैंकर खरीदने में ही लग जाएगी।
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सात दिन बाद भी पानी नहीं
मैहली महिला मंडल प्रधान मंजू वर्मा ने बताया कि आईपीएच के कर्मचारी कहते हैं कि तीसरे दिन पानी की आपूर्ति होगी। लेकिन तीन दिन के बजाय सात दिन बाद भी पानी नहीं आ रहा है। कभी हफ्ते बाद पानी आता है तो भी किसी-किसी घर में पहुंचता है। पहले हमें लोकल पानी की आपूर्ति होती थी लेकिन उस पानी को भी आईपीएच ने नगर निगम शिमला को दे दिया।

डेढ़ माह से झेल रहे दिक्कत
मैहली के स्थानीय निवासी अशोक वर्मा ने बताया कि डेढ़ महीने से पानी की दिक्कत आ रही है। कहा की जब आईपीएच के कर्मचारी को पूछा जाता है कि पानी कब आएगा तो एक ही जवाब मिलता है कि जब पीछे से आएगा तो सप्लाई दे देंगे।

पूरे इलाके में है दिक्कत
पुजारली पंचायत के प्रधान विनती शर्मा ने बताया कि पूरे क्षेत्र में एक हफ्ते से पीने के पानी की सप्लाई नहीं आई। कहा कि इस बारे में आईपीएच के अधिशासी अभियंता से बात की थी। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम शिमला ही पानी की सप्लाई दे रहा है। कहा कि नगर प्रशासन को इस समस्या को हल करने के लिए पुख्ता कदम उठाने चाहिए।

जलसंकट पर अफसरों के पास जवाब नहीं
राजधानी शिमला के लिए वर्तमान में पीने के पानी की उतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जितनी वांछित है। बुधवार को भी शिमला को 36.82 एमएलडी पानी की आपूर्ति हुई, जबकि 48 एमएलडी पानी की जरूरत है। यानी 11.18 एमलडी पानी कम आया। शीतकालीन अवकाश के बाद स्कूल भी खुलने लगे हैं। अब पानी की खपत और ज्यादा होगी। ऐसी स्थिति में कैसे पर्याप्त पानी की सप्लाई की जा सकेगी?

इस सवाल का आईपीएच विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे पा रहे हैं। शिमला जोन के मुख्य अभियंता आरएम मुकुल को पीलिया होने के कारण वे अवकाश पर हैं। उनका पदभार एक दिन पहले ही मुख्य अभियंता रघुवीर ने संभाला है। रघुवीर बोले कि वे अभी मामला समझ ही रहे हैं। बता कुछ नहीं पाएंगे। प्रमुख अभियंता आरके कंवर टिप्पणी हो हाजिर नहीं हो पा रहे हैं। उधर शहर के लोग पानी की कमी के चलते खासे परेशान हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। इस कारण लोगों के घरों का बजट भी बिगड़ रहा है।

‘अश्वनी खड्ड में पीने का पानी शुद्ध है या नहीं, ये मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नहीं देखता है। बोर्ड केवल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ही बात कर सकता है। इसी के ठीक होने के बाद अपनी रिपोर्ट दे सकता है। ट्रीट किए गए पानी को भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पीने योग्य नहीं मानता। ये आईपीएच विभाग को ही देखना होता है।’- कुलदीप सिंह पठानिया, अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

‘हम रेगुलर सैंपल ले रहे हैं। रोजाना बैठकें हो रही है। जब पानी में क्लीयरेंस आएगी, तभी हम कुछ फैसला लेंगे। वर्तमान में सैंपल पास नहीं हो रहे हैं।’ कहा कि जो भी फैसला लिया जाएगा उसमें सबसे पहले जनता का स्वास्थ्य ध्यान में रखा जाएगा।- डा. डीएस गुरंग, निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, हिमाचल प्रदेश।
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