बुधवार को राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई। शिमला में कार्यक्रम में शहरी विकास एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शहरी निकायों के नेतृत्व को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करने में सक्षम बनाना है। प्रशिक्षण और क्रियान्वयन में सहयोग से स्थानीय स्तर पर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकेंगे। उन्होंने एचयूएल की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सहयोग देगी। मंत्री ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां कचरा प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। प्रशिक्षण से शहरी निकाय इन चुनौतियों की पहचान कर प्रभावी योजनाएं तैयार कर सकेंगे।
800 से अधिक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
प्रदेश के 70 से अधिक शहरी निकायों के 800 से ज्यादा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को ठोस कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शहरी स्थानीय निकायों तक पहुंचेगी। कार्यक्रम का संचालन शहरी विकास निदेशालय के माध्यम से किया जाएगा। एचयूएल के कार्यकारी निदेशक बीपी बिदप्पा ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी शहरी निकाय व्यवस्था, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न संस्थाओं के बीच सहयोग जरूरी है। शहरी विकास विभाग के निदेशक डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि विभाग का प्रयास है कि हिमाचल प्रदेश के 10 शहरी स्थानीय निकाय शीर्ष प्रदर्शन करने वाले निकायों में शामिल हों।
मार्च 2027 तक होंगी 15 से अधिक कार्यशालाएं
नवंबर 2026 से मार्च 2027 तक 15 से अधिक कार्यशालाएं होंगी। इनमें शहरी निकायों की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक निकाय को 30, 60 और 90 दिन की कार्य योजना तैयार करनी होगी। इसके बाद योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए भी संबंधित निकायों को सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।