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Washington Apple: हिमाचली सेब के लिए फिर चुनौती बनेगा वाशिंगटन एप्पल, जानें पूरा मामला

Sun, 25 Jun 2023 11:17 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

बागवानों के लिए तुर्किये और ईरान के साथ अब अमेरिका का वाशिंगटन एप्पल भी चुनौती बनेगा।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी यात्रा के दौरान रीटेलिएटरी टैरिफ को वापस लेने का फैसला लिया है।
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सेब(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल के बागवानों के लिए तुर्किये और ईरान के साथ अब अमेरिका का वाशिंगटन एप्पल भी चुनौती बनेगा। 2018 में स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिका द्वारा लगाए आयात शुल्क के प्रतिशोध में भारत ने अमेरिकी सेब समेत 28 वस्तुओं पर 20 फीसदी रीटेलिएटरी टैरिफ (प्रतिशोधात्मक शुल्क) लगाया था, जिससे अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क 50 से बढ़कर 70 फीसदी हो गया था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी यात्रा के दौरान रीटेलिएटरी टैरिफ को वापस लेने का फैसला लिया है। आगामी 90 दिनों के भीतर यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। रीटेलिएटरी टैरिफ खत्म होने से भारत में अमेरिकी सेब का आयात बढ़ जाएगा, जिससे हिमाचली सेब की मांग घटेगी। किसान बागवानों के सबसे बड़े संगठन संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान और सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने इस फैसले पर चिंता जताई है और आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग उठाई है।

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हिल स्टेट हॉर्टिकल्चर फोरम के संयाेजक हरीश चौहान का कहना है कि केंद्र के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों को आर्थिक नुकसान होगा। वाशिंगटन एप्पल एक ब्रांड है, इसकी बाजार में अलग मांग है। रीटेलिएटरी टैरिफ में कटौती से स्वदेशी सेब की मांग पर असर पड़ेगा। 2018 से पहले अमेरिका से सबसे अधिक सेब का आयात होता था, जिससे हिमाचली सेब उत्पादकों को उपज की सही कीमतें नहीं मिल पाती थीं। रीटेलिएटरी टैरिफ लगने के बाद अमेरिकी सेब के आयात में गिरावट आई थी। सेब उत्पादक संघ का कहना है कि रीटेलिएटरी टैरिफ में कटौती तीन काले कृषि कानूनों को परोक्ष रूप से लागू करने की दिशा में ही मोदी सरकार का एक कदम है। प्रधानमंत्री ने 2013 में सोलन रैली में वादा किया था कि सेब पर आयात शुल्क बढ़ाएंगे। मोदी ने बागवानों के साथ वादाखिलाफी की है।

अफगानिस्तान की चेरी ने बढ़ाई बागवानों की मुश्किल, दाम घटे
अफगानिस्तान से चेरी समेत अन्य गुठलीदार फलों के आयात से हिमाचल के इन फलों के दामों में भारी गिरावट आई है। सीजन की शुरू में 2000 रुपये किलो तक बिकी शिमला की चेरी के दाम घट कर 100 रुपये से भी नीचे पहुंच गए हैं। इसे प्रदेश के फल उत्पादकों को नुकसान हो रहा है। देश की बड़ी मंडियों में अफगानिस्तान से प्लम, शकरपारा और खुमानी का भी आयात हो रहा है। हिमाचल स्टोन फ्रूट ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा ने सेब की तर्ज पर गुठलीदार फलों के लिए भी न्यूनतम आयात मूल्य तय करने की मांग की है।

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