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आज इस मंदिर में बरसेंगे 50 हजार अखरोट, यह है यहां की मान्यता

Wed, 21 Nov 2018 12:17 PM IST
राजकुमार सूद, अमर उजाला, बैजनाथ (कांगड़ा)
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बैकुंठ चौदस पर बुधवार को ऐतिहासिक शिव मंदिर में अखरोटों की बारिश का नजारा देखने को मिलेगा। देर शाम को रोजाना होने वाली आरती के बाद मंदिर परिक्रमा की बाएं तरफ स्थित मां पीतांबरी की मूर्ति की पूजा-अर्चना के उपरांत पुजारी मंदिर के ऊपरी हिस्से से अखरोटों की बारिश करेंगे।

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इस बार बारिश के लिए 50 हजार के करीब अखरोट उपयोग में लाए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इस दिन देवताओं के आग्रह पर संखासुर नाम के राक्षस का वध करके देवताओं को उनके इंदिरावती राज्य को वापस जीतने में सहयोग किया था।

संखासुर के वध की खुशी में इस दिन लोग अखरोटों की बारिश करके प्रसन्नता जाहिर करते हैं। मंदिर पुजारी सुरिंद्र आचार्य के अनुसार इसे देवशयनी एकादशी भी कहते हैं और इस दिन भगवान विष्णु छह माह तक सोने के बाद नींद से जागते हैं।
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कहा जाता है कि संखासुर राक्षस ने देवताओं से इंदिरावती राज्य छीन लिया और देवता जंगलों में जाकर गुफाओं में रहने लगे। गुफाओं में रहकर भी देवता प्रसन्न थे। यह सब देखकर संखासुर को आश्चर्य हुआ और जब उसे पता चला कि देवता वेद मंत्रों के उनके पास होने पर खुश रहते हैं, तो उसने वेद मंत्र छीनने का विचार किया।

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अनोखा है त्योहार

इस पर देवता भगवान विष्णु को जगाने लगे और एकादशी के दिन भगवान को जगाने के लिए पूजा अर्चना शुरू हुई तथा द्वादशी पर भगवान विष्णु नींद से जागे व बैकुंठ चौदस के दिन उन्होंने राक्षस से देवताओं को मुक्ति दिलाई।

बैकुंठ चौदस के बाद ही सभी धार्मिक आयोजन शुरू होते हैं । मंदिर अधिकारी एवं तहसीलदार वचित्र सिंह ठाकुर ने बताया कि पचास हजार अखरोट बारिश के दौरान उपयोग में लाए जाएंगे।  

ऐतिहासिक शिव मंदिर में बैकुंठ चौदस पर होने वाली अखरोटों की बारिश का यह त्योहार अपने आप में अनोखा है और देश में इस प्रकार के त्योहार को मनाने का अब तक कोई उल्लेख नहीं है। शुरुआती वर्षों में मंदिर परिसर में नीचे प्रांगण में ही अखरोट वितरित किए जाते थे।

बाद में मंदिर के ऊपरी भाग से यह बारिश शुरू हुई और वर्तमान में इस दिन सैकड़ों लोग मंदिर परिसर में शामिल होते हैं और अखरोटों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कुछ लोग इस दौरान चोटिल भी होते हैं।
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