फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल में बढ़ने लगा गिद्धों का कुनबा, रंग लाने लगी वन्य प्राणी मंडल की मुहिम

Thu, 24 May 2018 01:20 PM IST
विनोद कुमार शर्मा, अमर उजाला, हमीरपुर
विज्ञापन
विज्ञापन

पर्यावरण को साफ सुथरा बनाए रखने में मददगार मूक मित्र गिद्धों का कुनबा बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में प्रदेश से गिद्ध लुप्त हो गए थे। लेकिन वन्य प्राणी विभाग की कोशिशों के अच्छे नतीजे आने लगे हैं। कांगड़ा के पौंग, लालपुर, सुखनाला इलाकों में कराए गए सर्वे में गिद्धों के 356 घोंसले मिले हैं।

विज्ञापन


यही नहीं, इन घोंसलों में गिद्धों के 313 बच्चे भी पाए गए। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक गिद्धों के घोंसलों और बच्चों की संख्या के लिहाज से पिछले साल के मुकाबले इस साल के नतीजे बेहतर हैं। वन्य प्राणी विभाग हमीरपुर के बीते वर्ष के सर्वे में गिद्धों के 337 घोंसले और 293 बच्चे मिले थे।

पर्यावरण की स्वच्छता से लेकर पारिस्थितिकीय संतुलन में गिद्ध अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन  प्रदेश में गिद्धों की संख्या में तेजी से कमी आ रही थी। जिसे देखते हुए विभागीय स्तर पर विशेष प्रयास शुरू किए गए। पांच वर्ष पूर्व गिद्धों की गणना शुरू की गई जिसके आंकड़े बेहद नकारात्मक नजर आए।
विज्ञापन


विभाग ने कांगड़ा में गिद्धों के लिए फीडिंग स्टेशन स्थापित किया। इसके बाद इन स्टेशनों की संख्या तीन कर दी गई। एक स्टेशन को बाकायदा आधुनिक बनाया गया है। हमीरपुर के डीएफओ कृष्ण कुमार ने बताया कि कांगड़ा जिले के 48 स्थानों पर गिद्धों के घोंसले मिलते हैं।

इन्हीं इलाकों पर फोकस रखा गया। गणना के साथ गिद्धों की संख्या को बढ़ाने के प्रयास किए गए। अब इनके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। कांगड़ा जिले में करवाए गए सर्वे में इस बार गिद्धों के 356 घोंसले जबकि 313 बच्चे मिले हैं। यह संख्या हर साल बढ़ रही है।

चार जिलों में 99 फीसदी कम पाए गए थे गिद्ध- वन्य प्राणी विभाग ने ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिले में बीते दिनों सर्वे कराया और गिद्धों की संख्या जानने की कोशिश की। वन्य प्राणी मंडल हमीरपुर के डीएफओ कृष्ण कुमार का कहना है कि इनकी संख्या में 99 फीसदी की कमी पाई गई।

इसके बाद इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास हुए। जिला कांगड़ा में वन्य मंडल ने गिद्धों के संरक्षण के लिए मॉडर्न फीडिंग स्टेशन बनाया है। इसमें गिद्धों के बैठने के लिए कृत्रिम पेड़ लगाए गए हैं। यहां पानी और मांस की भी सुविधा है।

विभागीय दावों की मानें तो बीमार मवेशियों को दी जाने वाली दवा डिक्लोफिनेक ही इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है। दवा मवेशियों के शरीर में रहती है, जिनके मरने के बाद गिद्ध इन्हें खाकर तेजी से खत्म हो गए हैं।

गिद्दों को पकड़कर इनमें ट्रांसमीटर लगाएगा विभाग- गिद्दों की हरकत जानने के लिए वन्य जीव विभाग अब इनमें ट्रांसमीटर स्थापित करेगा। ट्रांसमीटर के जरिये विभाग देखेगा कि कौन से क्षेत्र में गिद्दों की ज्यादा हरकत है। विभाग ने इसके लिए रिपोर्ट तैयार कर ली है।

वन्य जीव विभाग गिद्दों को पकड़कर इनमें ट्रांसमीटर स्थापित करेगा। विभाग ट्रांसमीटर के माध्यम से देखेगा कि गिद्द कितने समय एक ही स्थान पर रहता है। यह भी देखा जाएगा कि गिद्द कहीं हिमाचल से अन्यों राज्यों में पलायन तो नहीं कर रहे। किस मौसम में गिद्द कहां रहते हैं। गिद्दों के संरक्षण को विभाग ने यह कदम उठाया है।

इस संबंध में वन्य प्राणी मंडल हमीरपुर के डीएफओ कृष्ण कुमार का कहना है गिद्दों की हरकत जानने के लिए इनमें ट्रांसमीटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन ट्रांसमीटर के जरिये देखा जाएगा कि कहीं गिद्द हिमाचल से अन्य राज्यों में पलायन तो नहीं कर रहे। इसके लिए रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। जल्द यह कार्य शुरू किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें