सरकारी लैब में मुफ्त होते हैं सभी टेस्ट, टेस्ट किट न मिलने से दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में चार सालों से विटामिन-डी की जांच ठप पड़ी है। सरकारी लैब में यह टेस्ट 133 मुफ्त परीक्षणों में शामिल है लेकिन वर्ष 2018 के बाद से सरकारी लैब में यह टेस्ट नहीं हो रहा। इसके बाद से अब तक इस जांच को शुरू नहीं किया जा सका है। इस वजह से सैकड़ों मरीजों को मजबूरी में निजी लैबों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वर्तमान में यह जांच केवल क्रस्ना लैब में की जा रही है लेकिन कई बार वहां भी टेस्ट किट उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को बाहर निजी लैबों का रुख करना पड़ता है। निजी लैबों में विटामिन-डी की जांच 800 से 1200 रुपये में होती है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। राज्य सरकार ने 133 मुफ्त जांचों (टेस्ट) का प्रावधान किया था ताकि लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें लेकिन इस मामले में मरीजों को निजी खर्च उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चिकित्सकीय दृष्टि से विटामिन-डी जांच अहम मानी जाती है। शरीर में इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, बच्चों में रिकेट्स (एक ऐसी बीमारी है जो बच्चों की हड्डियों को कमजोर और मुलायम बना देती है) और व्यस्कों में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों भंगुर हो जाती हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा रहता है) बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही मांसपेशियों में दर्द, थकान और रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी भी आती है। विटामिन-डी की जांच समय पर न होने से मरीज सही उपचार से वंचित रह जाते हैं और बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
नए सिरे से शुरू की जाएगी टेंडर प्रकिया
अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही सरकारी लैब में विटामिन-डी जांच फिर से शुरू कर दी जाएगी।
-राहुल राव, चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी