संघर्षरत दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने मंगलवार को सचिवालय के समीप चक्का जाम कर दिया। इससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। बीते 21 अप्रैल को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने मांगों के समाधान के लिए दृष्टिबाधितों को 15 मई तक मुख्य सचिव के साथ बैठक करने का आश्वासन मिला था, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। मंगलवार सुबह दृष्टिबाधितों ने फिर से चक्का जाम कर दिया। दोपहर करीब एक बजे यातायात पूरी तरह बहाल हो सका। पुलिस दृष्टिबाधितों को सड़क से हटाकर जबरन बस में बैठाकर कालीबाड़ी ले गई। दृष्टिबाधित बाधित संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर और पदाधिकारी शोभू राम ने बताया कि सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। बैकलॉग की भर्तियों की मांग को लेकर 27 मार्च से सचिवालय के समीप धरना चल रहा है, लेकिन सरकार सुध नहीं ले रही।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वह विभिन्न विभागों में खाली पड़े दृष्टिबाधित कोटे के बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरने की मांग कर रहे हैं। सरकार से कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। जब वह चक्का जाम करते हैं तो उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जाता है, लेकिन बाद में कुछ नहीं होता। पुलिस उनके साथ दुर्व्यवहार कर रही है। तब तक चक्का जाम चलता रहेगा, जब तक कि मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव उनसे मिलने नहीं आते। लंबे अरसे से दृष्टिबाधित कोटे के विभिन्न विभागों में पद खाली चल रहे हैं, लेकिन सरकार इसमें भर्तियां नहीं कर रही है।