फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: दृष्टिबाधितों ने किया चक्का जाम, पुलिस ने जबरन बस में बैठाकर कालीबाड़ी छोड़े

Tue, 20 May 2025 12:55 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

 शिमला में करीब 581 दिनों से अपनी मांगों के लिए संघर्षरत दृष्टिबाधित बेरोजगार मंगलवार को फिर उग्र हुए।
विज्ञापन
सचिवालय के पास दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने किया चक्काजाम। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बैकलॉग भर्तियों की मांग को लेकर बीते 581 दिनों से संघर्ष कर रहे दृष्टिबाधित संघ ने मंगलवार को फिर राज्य सचिवालय के पास चक्का जाम कर दिया। संघ के सदस्यों ने छोटा शिमला में सरकार की खिलाफ सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक जमकर नारेबाजी की। आश्वासन के बाद भी 15 मई तक बैठक के लिए नहीं बुलाने का दृष्टिबाधित संघ ने आरोप लगाया। सड़क बहाल करने को पुलिस ने जबरन बस में बैठाकर प्रदर्शनकारी कालीबाड़ी छोड़े। इस दौरान पुलिस और दृष्टिबाधितों के बीच धक्कामुक्की भी हुई।

विज्ञापन


संघर्षरत दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने मंगलवार को सचिवालय के समीप चक्का जाम कर दिया। इससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। बीते 21 अप्रैल को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने मांगों के समाधान के लिए दृष्टिबाधितों को 15 मई तक मुख्य सचिव के साथ बैठक करने का आश्वासन मिला था, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। मंगलवार सुबह दृष्टिबाधितों ने फिर से चक्का जाम कर दिया। दोपहर करीब एक बजे यातायात पूरी तरह बहाल हो सका। पुलिस दृष्टिबाधितों को सड़क से हटाकर जबरन बस में बैठाकर कालीबाड़ी ले गई। दृष्टिबाधित बाधित संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर और पदाधिकारी शोभू राम ने बताया कि सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। बैकलॉग की भर्तियों की मांग को लेकर 27 मार्च से सचिवालय के समीप धरना चल रहा है, लेकिन सरकार सुध नहीं ले रही।
विज्ञापन

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वह विभिन्न विभागों में खाली पड़े दृष्टिबाधित कोटे के बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरने की मांग कर रहे हैं। सरकार से कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। जब वह चक्का जाम करते हैं तो उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जाता है, लेकिन बाद में कुछ नहीं होता। पुलिस उनके साथ दुर्व्यवहार कर रही है। तब तक चक्का जाम चलता रहेगा, जब तक कि मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव उनसे मिलने नहीं आते। लंबे अरसे से दृष्टिबाधित कोटे के विभिन्न विभागों में पद खाली चल रहे हैं, लेकिन सरकार इसमें भर्तियां नहीं कर रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें