प्रदेश में सेब के पेड़ों पर वायरस की मार पड़ने लगी है। पत्तियां मुर्झाने लगीं हैं। मई से जून तक दिन में गर्मी और रात को ठंड से सेब की पत्तियों पर विपरीत असर पड़ रहा है। पत्तियों में पीले धब्बे पड़ने से बागवान परेशान हैं। वायरस से पत्तियों का आकार बिगड़ रहा है। वायरस से निपटने को फिलहाल कोई दवा उपलब्ध नहीं हैं। बागवान पेड़ों की प्रूनिंग के समय वैज्ञानिक सलाह जरूर लें।
सेब सीजन करीब आ रहा है और पेड़ों में पत्तियां मुरझाने से बागवान परेशान हैं। वायरस का असर ज्यादा रहा तो सेब उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है। सेब पेड़ों में यह वायरस मई और जून में ज्यादा असर दिखाता है। पत्तियों में पीले धब्बे पड़ने लगते हैं और इनका आकार बिगड़ने लगता है।
शिमला जिले के जुब्बल कोटखाई, चौपाल, थानाधार क्षेत्र, ठियोग और जिला कुल्लू के कई भागों में सेब पेड़ों में वायरस का असर है। जुब्बल के बागवान संजय ठाकुर और थानाधार क्षेत्र के बागवान वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि बगीचों में कुछ पेड़ों में बेमौसमी पत्तियां मुर्झाने लगी हैं। पहले पत्तियों पर पीले धब्बे पड़ते हैं। फिर इनका आकार बिगड़ रहा है।
यह कहते हैं कि बागवानी विशेषज्ञ
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि सेब पेड़ों पर वायरस से बचने के लिए फिलहाल कोई दवा नहीं है। सेब को वायरस से बचाने के लिए प्रूनिंग के समय ध्यान देना जरूरी है। प्रूनिंग के समय वायरस वाले सेब के पेड़ों को चिन्हित कर लें और जिस कैंची से कांट-छांट करते हैं, उसका प्रयोग स्वस्थ पेड़ों में न करें।
सूखी और मुरझाई पत्तियां बारिश के बाद झड़ जाती हैं और नई पत्तियां आती हैं। वायरस का असर ज्यादा हो तो फलों की पैदावार कम हो जाती हैं। फिलहाल, देश में वायरस से बचाव के लिए दवा उपलब्ध नहीं है।