फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्मचारियों को सीएम वीरभद्र सिंह का तोहफा

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी महकमों में तदर्थ (एडहाक) आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने के लिए हिमाचल सरकार एक स्थाई पॉलिसी लाएगी। ये ऐलान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मंगलवार को धर्मशाला में आयोजित पंचायत तकनीकी सहायक संघ के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में किया।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थाई नीति से कर्मचारियों के वित्तीय लाभ नियमित हो जाएंगे। वर्तमान में सरकार एडहाक कर्मचारियों को विभिन्न अनुदानों से वेतन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में एडहाक भर्तियों का रिवाज भाजपा कार्यकाल में शुरु हुआ था। राज्य सरकारें वित्तीय बोझ से बचने के लिए पिछले कई सालों से ये भर्तियां कर रही हैं।

लेकिन वर्तमान राज्य सरकार तदर्थ आधार पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करेगी। इसलिए इनके लिए स्थाई नीति लाने पर विचार किया जा रहा है। आगामी बजट सत्र से पूर्व इस बारे में फैसला हो जाएगा। इस बारे में कैबिनेट में भी जल्द चर्चा होगी। जिन कर्मचारियों ने 6 से 8 आठ वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें नियमित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इससे न केवल पंचायत तकनीकी सहायकों बल्कि दूसरे विभागों में तदर्थ आधार पर कार्यरत कर्मियों को भी लाभ मिलेगा।
विज्ञापन

विज्ञापन

12 वर्षों से सेवाएं दे रहे पंचायत सहायक

इससे पूर्व पंचायत तकनीकी सहायक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भुवनेश कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री को अपनी मांगों से अवगत करवाते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 1200 पंचायत सहायक कार्यरत हैं, जिनमें से 840 पिछले 12 सालों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं और शेष पिछले पांच सालों से विभाग में कार्यरत हैं।

उन्होंने तकनीकी सहायकों को कार्यों के आधार पर दिए जाने वाले कमीशन को बंद करने की मांग भी की। इससे पूर्व, पंचायत तकनीकी सहायक संघ के जिला अध्यक्ष अश्वनी कुमार ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव जगजीवन पाल, विधायक संयज रतन, अजय महाजन, मनोहर धीमान, पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू और रणजीत बक्शी, कांगड़ा केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष जगदीश सिपहिया, राज्य वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया, डीसी कांगड़ा सी पालरासू, शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष बलबीर तेगटा आदि इस दौरान उपस्थित थे।

पंचायत तकनीकी सहायक संघ के अध्यक्ष भुवनेश शर्मा ने बताया कि वह पंचायतों में पिछले 14 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में पंचायत में 80 से 90 फीसदी विकास कार्यों के लिए धन पंचायत तकनीकी सहायकों के माध्यम से ही खर्च किया जाता है, लेकिन वर्तमान समय में हालत यह है कि मिस्त्री को पंचायत में 271 रुपये दिहाड़ी मिल रही है और पंचायत सहायकों को 240 रुपये मिलते हैं।

शर्मा ने कहा कि प्रदेश में पॉलीटेक्निक डिप्लोमा करके 1142 पंचायत सहायक 14 वर्ष पूर्व 200 से 400 रुपये में लगे थे। इसके बाद 1200 रुपये, फिर कमीशन और अब दैनिक भोगी बनाया गया है। इन सभी चरणों से गुजरने के लिए उन्हें हर बार साक्षात्कार भी देने पड़े हैं, लेकिन फिर भी अब तक नियमित नहीं हुए। उन्होंने कमीशन की परंपरा को भी खत्म करने की मांग की।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें