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पट्टिकाएं तोड़ने की बात पर भड़के सीएम, धूमल को कह डाला चौकीदार

Sat, 27 Aug 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता विपक्ष प्रो. प्रेमकुमार धूमल शुक्रवार को विधानसभा के मानसून सत्र में फिर आमने-सामने हुए। इस बार दोनों दिग्गज उद्घाटन और शिलान्यास पट्टिकाओं को लेकर भिड़ गए। दोनों ने एक-दूसरे की सरकारों पर पट्टिकाओं को तोड़ने और हटाने का आरोप लगाया। उद्घाटन के लिए अधिकृत प्रतिनिधियों के सवाल को लेकर भी सदन में खूब बहस हुई।
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मुख्यमंत्री की ओर से नेता विपक्ष पर की गई टिप्पणी पर कुछ विपक्षी सदस्यों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध भी जताया। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने अनुपूरक प्रश्न करते हुए पूर्व की भाजपा सरकार के समय में शिलान्यास पट्टिकाओं को हटाने की बात कही।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने जानबूझ कर पूर्व मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार और रामलाल ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते लगाई गई पट्टिकाओं को तोड़ा। मुख्यमंत्री ने बमसन परियोजना का जिक्र करते हुए कहा इस शिलान्यास पट्टिका को भाजपा सरकार ने टैंकों के बीच में लगाया है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को तोड़ी गई शिलान्यास पट्टिकाओं को दोबारा लगाने के आदेश दिए हैं।
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धूमल बोले शौच के बहाने पट्टिका देखने गए थे सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि पट्टिकाएं तोड़ने से इतिहास नहीं बदलता है। इस पर नेता विपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि मुख्यमंत्री मामले को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने कांगड़ा सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक धर्मशाला में उनकी उद्घाटन पट्टिका को तोड़ कर छोटा किया।

यह आदेश मुख्यमंत्री ने ही दिए थे। इसके कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री स्वयं शौच जाने के बहाने इस पट्टिका को देखने गए कि उसे बदला गया है या नहीं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या आप वहां चौकीदार थे। इस पर नेता विपक्ष ने कहा कि आप के लोग ही ऐसी जानकारी रखते हैं।

उन्होंने रोहड़ू में सर्किट हाउस का शिलान्यास किया था लेकिन बाद में कांग्रेस सरकार ने शिलान्यास और उद्घाटन पट्टिका को एक कर दिया। इसी तरह रामपुर में तो बस अड्डे को ही बदल दिया गया। धूमल ने कहा- पत्थरों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। काम से विकास की इबारत लोगों के दिलों पर लिखी जाती है, जो भाजपा ने लिखी है।

इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने ही कांगड़ा केंद्रीय बैंक की पट्टिका को बदला है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कमरे की पूरी दीवार के बराबर पट्टिका कहीं नहीं देखी। कमरे की दीवार के बराबर पट्टिका लगाना भद्देपन की हद है। वह इस उद्घाटन को कभी नहीं करते।

इस पर नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की मानसिकता विचित्र है। उन्होंने सोलन सब्जी मंडी का उदाहरण देते हुए कहा कि सोलन सब्जी मंडी का शिलान्यास हमने किया तथा इसे हमने तैयार किया। लेकिन रोड पर मुख्यमंत्री की बड़ी पट्टिका लगी है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने दिल को देखो। उसमें कितना मैल, प्रतिशोध और विष की भावना भरी है।

इस पर सदन में खूब हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छठी बार के मुख्यमंत्री किस प्रकार की भाषा का मापदंड इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह के शब्द वापिस लेने या इसे सदन की कार्यवाही से बाहर निकालने की मांग की। इस दौरान विपक्ष के कुछ सदस्य अपनी-अपनी सीट पर खड़े हो गए तथा शोरशराबा हुआ।

नशा कारोबार पर अब तुरंत होगी गिरफ्तारी

नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए हिमाचल सरकार कानून को और कड़ा करने जा रही है। अब नशीली और बिना लाइसेंस दवाएं बेचते पकड़े गए तो शक के आधार पर भी आरोपी की गिरफ्तारी होगी। बिना लाइसेंस के दवा रखना अब गैर जमानती अपराध हो जाएगा। अब नशीली दवाएं पकड़े जाने पर दवा नियंत्रक को नहीं, बल्कि आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना होगा।

शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में इस संबंध में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री विधेयक रखा गया। इसे शनिवार को पारित किया जाएगा। विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि आज की तारीख में धारा 18(ग) का उल्लंघन असंज्ञेय और जमानतीय है। ऐसे में ड्रग नियंत्रण से जुडे़ अधिकारियों को दोषियों को गिरफ्तार करने और आगामी जांच तक उन्हें हिरासत में रखने के लिए दिक्कतें आ रही हैं।

यदि 18(ग) के उल्लंघन को संज्ञेय और गैर जमानती बना दिया तो अपराधियों पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा। इससे दवाओं को गलत हाथों में पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। ऐसे सभी परिसरों को दवा नियंत्रक और निरीक्षक सील कर सकेंगे, जिनमें नियमों के विरुद्ध प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जा रही है।

एएसआई कर सकेगा दवाएं सीज व सील  
जब कोई दवा या कास्मेटिक बिना लाइसेंस के बेचने या वितरण करने का शक या शिकायत हो तो उसे सील और सीज किया जा सकता है। ये धारा 18 के प्रावधानों का उल्लंघन है। जांच अधिकारी को इसकी सूचना जल्द न्यायिक मजिस्ट्रेट को देनी होगी। हिमाचल पुलिस का एएसआई दर्जे या इससे अधिक स्तर का अधिकारी बगैर किसी वारंट के  ऐसे अधिकारी को गिरफ्तार कर सकेगा। पुलिस अधिकारी इसके लिए दवा निरीक्षक की भी मदद ले सकेगा।

वित्तीय स्थिति ठीक नहीं, रेगुलर नहीं हो सकती भर्तियां

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में रेगुलर भर्तियां नहीं की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अनुबंध कार्यकाल पूरा होने वाले कर्मचारियों को नियमित कर रहा है। हिमाचल में वर्ष 2015-16 में 2842 अधिकारी और कर्मचारियों को नियमित किया गया। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के 795 डॉक्टर अनुबंध आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। इसमें 417 चिकित्सा अधिकारी, 108 दंत चिकित्सा अधिकारी और 270 आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा विभाग में 1594, दंत स्वास्थ्य सेवा में 8, उद्यान विभाग में 94, निर्वाचन विभाग -1 और अभियोजन में -1, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में 46, स्वास्थ्य विभाग में 55, पशुपालन में 16, पुलिस में 18, गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा व कारागार में 1-1, सूचना एवं जन संपर्क में 19, आबकारी एवं कराधान में 4, उपायुक्त कार्यालय सोलन में 2 पद भरे गए हैं।

महिला एवं बाल विकास में 28, कृषि विभाग में 244, उच्चतर शिक्षा में 378, अर्थ एवं संख्या में 1, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले में 7, परिवहन में 2, आयुर्वेद में 140, सहकारिता में 2, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक मामले में 6, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 10, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग में 12, पर्वतारोहण एवं सहबद्ध खेल संस्थान मनाली में 1 योजना में 3, ग्रामीण विकास में 28, उद्योग में 20 पद भरे गए हैं।

वन में 8, पंचायती राज में 2, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी में 3, लोक निर्माण में 24, उपायुक्त कार्यालय चंबा एवं उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर में 2-2, उपायुक्त कार्यालय हमीरपुर में 3, उपायुक्त कार्यालय कांगड़ा में 2, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण में 2, उपायुक्त कार्यालय कुल्लू में 2, उच्च न्यायालय में 7, अग्निशन सेवाएं में 19, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में 1, सचिवालय प्रशासन 4 और चिकित्सा शिक्षा 4 सैनिक कल्याण विभाग में 10, हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग में 1, उपायुक्त कार्यालय लाहौल-स्पीति में 4 पद भरे गए हैं।

वर्मिन बंदरों को मारने की समय सीमा बढ़ाने को केंद्र को पत्र लिखेगी सरकार

बंदरों को वर्मिन घोषित करने की मियाद बढ़ाने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी। साथ ही बंदरों के अलावा नील गाय और सुअरों को वर्मिन घोषित करने के लिए भी केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को यह बात मानसून सत्र के चौथे दिन विपक्ष द्वारा लाए गए संकल्प प्रस्ताव के जवाब में कही। कहा कि पशुओं खासकर गोवंश के रखरखाव के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर केंद्र को आर्थिक सहयोग के लिए भेजी जाएगी।

शुक्रवार को विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा विधायक महेंद्र सिंह लावारिस पशुओं की बढ़ती तादाद और उससे होने वाले नुकसान पर संकल्प सदन में लेकर आए। इस दौरान महेंद्र सिंह के अलावा कुलदीप कुमार, नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, जगजीवन पाल, महेश्वर सिंह, सोहन लाल, कर्नल रविंद्र सिंह, राम कुमार और सुरेश कश्यप ने अपने विचार रखे। सीएम समेत अधिकतर सदस्यों ने इस दौरान बंदरों व अन्य जंगली जानवरों को मारने पर एकराय व्यक्त की। कहा कि बंदरों को मारने के अलावा सरकार उनके निर्यात के लिए भी केंद्र सरकार से बात करेगी। साथ ही उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए गोवंशीय पशुओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही।

लावारिस पशुओं की समस्या के लिए लोग स्वयं जिम्मेवार
चर्चा के दौरान सीएम ने सभी से अपील की कि वह अपने पशुओं को लावारिस न छोड़ें। ऐसी मानसिकता वाले लोगों के लिए सरकार जल्द ही कड़ा कानून लाएगी जिससे पशु को छोड़ने वालों पर अंकुश व सजा का प्रावधान किया जा सके। वर्तमान स्थिति के लिए सबसे ज्यादा इंसान खुद जिम्मेदार है। इंसान को जब तक किसी भी जानवर से फायदा मिलता है तब तक वह उसे रखता है। लेकिन जैसे ही वह बेकार हो जाए तो उसे लावारिस छोड़ देते हैं। यह बेहद खराब मानसिकता है, जिसे बदलना बेहद जरूरी है। अगर मानसिकता में बदलाव न हुआ तो आने वाले समय में लोग अपने बूढ़े मां बाप व दादा दादी को भी ऐसे ही छोड़ दिया करेंगे।

मेरी फैक्टरी साबित करो इस्तीफा दे दूंगा : बिंदल

दून से कांग्रेस विधायक राम कुमार और नाहन से भाजपा विधायक डा. राजीव बिंदल के बीच शुक्रवार को सदन में खूब नोकझोंक हुई। विधायक राम कुमार ने कहा, 24 अगस्त को कानून एवं व्यवस्था को लेकर हुई चर्चा में बिंदल ने उनके नाम का जिक्र किया। उन्होंने बिंदल को संबोधित करते हुए कहा जिनके घर शीशे के होते हैं उन्हें दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।

कहा, बिंदल के भाई की बद्दी के नजदीक किश्नपुरा में कैंसर के एंजेक्शन बनाने की फैक्टरी नियमों का उल्लंघन कर पूर्व भाजपा सरकार के समय में लगाई गई है। इस फैक्टरी को देश के अन्य राज्यों ने लगाने से इंकार कर दिया था। जहां फैक्टरी को लगाया गया, उसके सामने से गुरुद्वारे को भी हटाया गया। राम कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा बिंदल ने भाजपा सरकार के समय सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ाई।

राम कुमार के इन आरोपों पर राजीव बिंदल भड़क गए। उन्होंने कहा बीबीएन, सोलन सहित प्रदेश में कहीं भी मेरी कोई फैक्टरी नहीं है। मेरी फैक्टरी साबित कर दो - मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। उन्होंने राम कुमार पर गुंडागर्दी करने और झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। कहा, मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। इस मामले को लेकर सदन में काफी देर हंगामा हुआ।

शिमला के घंडल में खुलेगा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय

स्वास्‍थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर विधानसभा जाते हुए - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना शिमला के घंडल में होगी। हिमाचल में बनाए जाने वाले इस विधि विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनकी ओर से सुझाए गए उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश होंगे। विधि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसकी स्थापना का विधेयक सदन के पटल पर रखा।

इस विधेयक के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुलपति पारंगत विद्वान और विधि में उत्कृष्ट विद्वान या विख्यात विधिवेता होगा। वह विश्वविद्यालय का पूर्णकालिक वैतनिक अधिकारी होगा। पांच साल के लिए या 65 साल की उम्र तक इस पद पर नियुक्ति होगी।

इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पहले ही एक ऑर्डिनेंस आ गया था। ये एक जुलाई 2016 से लागू हो गया था। इस अध्यादेश के बाद ही सदन में इससे संबंधित विधेयक का पारित किया जाना अनिवार्य था। इसे शुक्रवार को सदन के पटल पर रखा गया। इस विधेयक के पारित होने के बाद नया कानून एक जुलाई से ही लागू माना जाएगा।

अब टेलीफोन पर भी हो जाते हैं उद्घाटन

भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल के मूल सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की सरकारी स्कीमों, प्रोजेक्टों के शिलान्यास और उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा व उनकी अनुमति से किसी के भी द्वारा किए जाते हैं। वर्तमान समय में जरूरी नहीं कि स्वयं जाकर उद्घाटन किया जाए।

टेलीफोन और वीडियो कांफ्रेंस से भी उद्घाटन होते हैं। एक बार प्रधानमंत्री ने 400 उद्घाटन एक साथ कर दिए थे। मुख्यमंत्री और मंत्री की गैर मौजूदगी में टेलीफोन के माध्यम से उद्घाटन किए जाते हैं। मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री मौके पर अगर खुद न जा सके तो सीपीएस, विधायक या बोर्ड, निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को उद्घाटन, शिलान्यास करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाहन ब्लॉक के राजकीय उच्च विद्यालय मंडलाह का उद्घाटन अध्यक्ष हिमफेड अजय बहादुर सिंह की ओर से किया गया था।

जिसने सोलन सब्जी मंडी नहीं बनाई, वो इस्तीफा दे
शिमला। सदन में कृषि और ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि सोलन सब्जी मंडी को हमने तैयार किया है। इस पर विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि यदि कृषि मंत्री की बात सही है तो हम त्यागपत्र देंगे तथा यदि वह गलत हैं तो उन्हें इस पद से त्यागपत्र देना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि यह दु:ख की बात है कि केबिनेट मंत्री उद्घाटन व शिलान्यास के बारे में नहीं जानते हैं। उन्होंने इस मामले की जांच करने की मांग की। कहा कि यदि इस सब्जी मंडी को हमने बनाया है तो आप त्यागपत्र देंगे तथा यदि इसे आपने बनाया होगा तो हम त्यागपत्र देंगे। इस दौरान विपक्षी विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने भी सोलन सब्जी मंडी के उद्घाटन और शिलान्यास को लेकर त्यागपत्र की चुनौती दी।
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तरखानों को एससी का दर्जा दिलाने को विधानसभा एकमत

हिमाचल के तरखानों को लोहार जाति (एससी) का दर्जा दिलाने के प्रस्ताव को विधानसभा में पारित कर केंद्र सरकार को भेजने का फैसला लिया गया। यह संकल्प प्रस्ताव भाजपा विधायक गुलाब सिंह ठाकुर और कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह ने गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस के तहत लाया था। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मामले में हस्तक्षेप कर सर्वसहमति से इसे पारित करने की बात कही।

इससे पूर्व विधायक गुलाब सिह ठाकुर ने तरखानों की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि तरखानों को लोहारों की तर्ज पर अनुसूचित जाति का दर्जा न होने से यह जाति आर्थिक, सामाजिक और पिछड़ापन झेलने को मजबूर है। प्रदेश में इस समय तरखानों की जनसंख्या 50 से 60 हजार है। दोनों जाति में शादियां हो रही है लेकिन तरखानों को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिल रहा है।

कांग्रेस विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि लोहार और तरखान एक ही जाति के लोग है। आरक्षण में विसंगति के कारण एक ही परिवार के लोगाें के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं। विधायक आईडी धीमान ने कहा कि उनकी एक बेटी की शादी लोहार के घर में और एक की तरखान के घर में हुई है। ऐसे में एक बेटी को आरक्षण का लाभ मिल रहा है जबकि दूसरी को नहीं। उन्होंने इसे बड़ी असमानता करार दिया। विधायक मनोहर लाल धीमान ने यह संकल्प लाने के लिए गुलाब सिंह का आभार जताया।
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