सूचना के दूर-दूर तक वायरलेस संचार के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) का उपयोग किया जाता है जो इलेक्ट्रोमेग्नेटिक स्पेक्ट्रम का हिस्सा है, जो हमारी आंखों को नजर नहीं आता है। लेकिन वायरलेस संचार का भारत में ज्यादा उपयोग होने से आरएफ स्पेक्ट्रम में उपलब्ध चैनलों की बहुत कमी हो गई है।
बाधारहित संचार के लिए यह जरूरी है। ऐसे में कॉग्निटिव रेडियो (सीआर) एक उभरती हुई इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी है जिसका मकसद आरएफ के उपयोग का विस्तार करते हुए स्पेक्ट्रम की कमी दूर करना है।
भारत में राष्ट्रीय रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटन की जिम्मेदारी संचार एवं सूचना तकनीकी मंत्रालय के एक प्रभाग राष्ट्रीय रेडियो नियामक प्राधिकरण को दी गई है, जो संचार के उद्देश्यों से रेडियो फ्रीक्वेंसी का आवंटन करता है। इस रेडियो फ्रीक्वेंसी क्षेत्र के अंदर संचार के उद्देश्य से एक फिक्स्ड बैंड निर्धारित किया गया है।
फ्रीक्वेंसी के आवंटित बैंड के अंदर कुछ खाली व्हाइट चैनल उपलब्ध होते हैं जो उपयोग में नहीं रहते हैं। लेकिन तेजी से बढ़ते वायरलेस संचार के दौर में लाइसेंस युक्त स्पेक्ट्रम के पूरे हिस्से का उपयोग नहीं होना संचार में एक रुकावट पैदा करता है।
ऐसे दूर होगी रुकावट
डॉ. श्रेष्ठ ने अपने शोध क्षेत्र की बुनियादी जानकारी देते हुए कहा कि कॉग्निेटिव रेडियो की मदद से ट्रांसमीटर/ रिसीवर (ट्रांसीवर) को व्हाइट चैनल का पता चल जाता है, जिनके ऊपर ‘संचार’ किया जा सकता है और इस तरह पहले से व्यस्त चैनलों पर जाने से बचा जा सकता है। सीआर का पहला कदम व्हाइट चैनलों की पहचान करना है। आरएफ वेव्स में व्हाइट चैनलों की पहचान के लिए पूरी दुनिया में विभिन्न पद्धतियों का विकास किया जा रहा है।