हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की खराहल घाटी के शहीद बालकृष्ण को सम्मान दिलाने के लिए लोगों को आखिरकार सड़क पर उतरना पड़ा। जिला मुख्यालय कुल्लू में बुधवार को खराहल घाटी की विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और लोगों ने प्रदर्शन किया। सैकड़ों लोगों ने ढालपुर के रथ मैदान से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। शहीद बालकृष्ण के पिता महेंद्र सिंह ने दो टूक कहा कि सरकार और जिला प्रशासन को 15 अगस्त तक का समय दिया है।
इसके बाद वह उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनशन करेंगे।
उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मांग पत्र भेजा गया। गाहर पंचायत के प्रधान रोहित वत्स धामी ने कहा कि पूईद गांव के बालकृष्ण जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में 5 अप्रैल 2020 को दुश्मनों से लोहा लेते समय शहीद हो गए थे। उनकी शहादत को एक साल हो गया है। अभी तक न तो शहीद का स्मारक बन सका है और न ही अस्पताल, कॉलेज और बस स्टैंड का नामकरण किया गया है।
सरकार ने इसकी घोषणा की थी, लेकिन ये घोषणाएं धरातल पर उतरी ही नहीं। पूईद पंचायत के प्रधान सर चंद ठाकुर ने कहा कि पिछले एक साल से सरकार और प्रशासन से यह मांग की जा रही है कि कुल्लू में शहीदों की याद में स्मारक बनाया जाए, लेकिन उनकी बात को नहीं सुना जा रहा है। अब ऐसे नहीं चलेगा। इस दौरान जां पंचायत प्रधान विजेंद्र शर्मा, सेउगी पंचायत की प्रधान प्रभा शर्मा, उपप्रधान चुनी नेगी मौजूद रहे। एसडीएम सदर विकास शुक्ला ने कहा कि नौ अगस्त को खराहल घाटी के पंचायत प्रतिनिधियों और लोगों को बात करने के लिए बुलाया गया है। शहीद सैन्य जवान को पूरा सम्मान दिया जाएगा।
पिता ने नहीं लिए थे 20 लाख, बोले - शहीद स्मारक बनने और नामकरण की शर्त पूरी होने पर ही लूंगा राशि
शहीद बालकृष्ण के पिता महेंद्र सिंह ने दो टूक कहा कि जब तक शहीद स्मारक नहीं बनाया जाता है, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। सरकार ने अस्पताल, कॉलेज और बस स्टैंड का नामकरण बालकृष्ण के नाम से करने की घोषणा की थी। कोई भी घोषणा पूरी नहीं हो सकी है। सरकार और जिला प्रशासन को 15 अगस्त तक का समय दिया है। इसके बाद वह अनशन करेंगे। महेंद्र सिंह ने कहा कि 15 दिसंबर 2020 को उन्हें एक पत्र मिला। इसमें 20 लाख की मदद देने की बात थी। एसडीएम सदर और तहसीलदार ने उनके घर पर उन्हें यह राशि देनी चाही, लेकिन उन्होंने राशि नहीं ली।
परिजनों ने खुद बनवाई थी शहीद बेटे की प्रतिमा
आखिर में परिवार के लोगों ने अपने ही घर में शहीद की प्रतिमा बनाई। सरकार शहीद को सम्मान देना भूल गई। पिछली बार कुल्लू दौरे पर आए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ध्यान में भी मामला लाया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।