यह रकम चंडीगढ़ में एक मध्यस्थ के जरिये आवेदन करने वाली पार्टियों से मिलती थी। अब तक की जांच में खुलासा हुआ है कि अकेले वर्ष 2010 में ही राजस्व विभाग ने ढाई सौ से ज्यादा मामलों में धारा 118 के तहत अनुमति दे दी।
सूत्रों की मानें तो मामले की जांच के दौरान मुश्किलें बढ़ाने जा रहे अब तक आधा दर्जन लोगों ने बतौर सरकारी गवाह अपने बयान दर्ज कराने की रजामंदी दे दी है। उनकी रजामंदी के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने मामले में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।