जांच में उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि मित्रा के वर्तमान में राज्य चुनाव आयुक्त के संवैधानिक पद पर आसीन होने के चलते गिरफ्तारी से पहले सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा। ऐसे में ब्यूरो गिरफ्तारी के बजाय पहले ही आरोपी के तौर पर पूछताछ व अन्य कार्रवाई के लिए अनुमति मांग रहा है।
सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार मित्रा को आरोपी के तौर पर देखने की मंजूरी देती है तो इसके बाद ब्यूरो को गिरफ्तारी के लिए मंजूरी नहीं लेनी होगी। इसके बाद भी अगर वह उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करना चाहेगा तो अभियोजन मंजूरी सरकार से लेनी ही पड़ेगी।