प्रोजेक्ट के समझौते के अनुसार सेब पौधों का आयात करते समय डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिकों और बागवानी विभाग के अधिकारियों की टीम को इटली भेजा जाना था।
जब सेब के पौधे इटली से आयात किए जाने थे तो मौके पर जाकर टीम ने पौधों की स्थिति का जायजा लेना था। टीम के सदस्यों के समक्ष सेब के पौधों को नर्सरी से उखाड़ा जाना था। इसके बाद सेब के पौधों की पैकिंग भी टीम के सामने ही होती थी।
फरवरी से पहले आयात होने थे सेब के पौधे
इटली से हिमाचल को सेब के पौधे फरवरी से पहले भेजे जाने थे ताकि इन पौधों के नर्सरियों और बगीचों में लगाया जा सकता। ऐसा न करके सेब के पौधे मई और जून में आयात किए गए जबकि अधिक तापमान में नए सेब पौधे नहीं उगाए जा सकते। इनकी रोपाई सर्दी में ही होती है।
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि बागवानी विकास मिशन के तहत खरीदे तीन लाख सेब के पौधों में से पचीस फीसदी से अधिक पौधे सूखे पाए गए हैं। ये पौधे गलत समय पर आयात किए गए। प्रोजेक्ट की शर्त के अनुसार नौणी विवि के वैज्ञानिकों और बागवानी अधिकारियों की टीम ने सेब के पौधे आयात करने जाना था। यह टीम न भेजकर एक विदेशी को इटली सेब के पौधों के लिए भेजा गया। इस कारण सरकार इस मामले की विजिलेंस जांच कराएगी। अभी सरकार को इस संबंध में लिखा जाना है ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।