सूत्रों के अनुसार अब तक दो दर्जन लोगों के बयान लिए जा चुके हैं। जबकि डेढ़ दर्जन को लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इन नोटिसों का जिन लोगों ने रिप्लाई कर दिया है उन्हें शिमला स्थित एफएसएल लैब में टेस्ट के लिए बारी-बारी से भेजा जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि जो लोग नोटिसों का जवाब नहीं दे रहे हैं, उनके खिलाफ अब विजिलेंस गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रही है। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जिस कथित रिकार्डिंग के आधार पर जांच की जा रही है उसमें 10 से ज्यादा लोगों के नाम सीधे तौर पर सामने आए हैं।
जिनपर ब्यूरो अपना शिकंजा कसता जा रहा है। ऐसे में अगर जांच ऐसी ही बढ़ी तो पूर्व मुख्य सचिव समेत कई पूर्व व वर्तमान अधिकारियों कर्मचारियों व कुछ आम लोगों की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।