उपराष्ट्रपति एम वेंकया नायडू शनिवार सुबह साढ़े दस बजे एनआईटी के हेलीपेड पर भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से उतरे। उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी थे। इसके बाद गार्ड ऑफ आनर हुआ। राजकीय सम्मान के बाद वह सीधे एनआईटी के सभागार में पहुंचे।
यहां पर सबसे निजी विवि के कुलपति ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, उनके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, चौथे नंबर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत, पांचवें नंबर पर उपराष्ट्रपति ने मंच पर संबोधित किया। लेकिन समय की पाबंदी के चलते उपराष्ट्रपति काफी नाराज हुए।
उन्हें 12:12 मिनट पर भाषण के लिए आमंत्रित किया जा रहा था, लेकिन वह पहले ही मंच पर पहुंच गए और मंच संचालक का भाषण रुकवा दिया। उपराष्ट्रपति ने 12:35 पर अपना भाषण खत्म किया। इसके बाद दोबारा मंच संचालक ने मंच पर पहुंचकर विवि की ओर से धन्यवाद भाषण के लिए बोला तो उपराष्ट्रपति ने फिर उन्हें टोकते हुए कहा कि उनकी 12:50 पर फ्लाइट है।
इसलिए उनके पास समय नहीं है। उपराष्ट्रपति के कहने पर राष्ट्रगान गाया गया। जिसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर हुआ और वह वायुसेना के विमान से जालंधर के लिए रवाना हो गए। जेपी नड्डा कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति के साथ एक ही विमान में आए और वापस उनके साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
मातृभूमि को कभी न भुलाएं
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल के लोग अपने दृष्टिकोण तथा कार्य में सुंदर व निपुण हैं और उनसे इस परंपरा को जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मां, अपनी मातृ भूमि तथा मातृ भाषा को कभी नही भूलना चाहिए। कहा कि माता-पिता को मम्मी डेडी नहीं बल्कि अम्मा या मां कहकर पुकारना चाहिए। उन्होंने लोगों से सद्भाव से तथा प्रकृति के साथ रहने का आग्रह किया।
एनआईटी हमीरपुर के सभागार में शनिवार को राष्ट्रीय युवा साइंस कांग्रेस कार्यक्रम में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मानवतावादी विचारों तथा मानवीय स्पर्श के बगैर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अप्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग चिंता का विषय है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिकों से आगे आने का आग्रह किया। कहा कि आज की सभी बीमारियां हमारी बुरी जीवनशैली के कारण हैं।
खेती में रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनशाकों का अत्यधिक प्रयोग न केवल हमारी भूमि को बंजर बना रहा है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। जीरो बजट प्राकृतिक कृषि इस सबका समाधान है। उन्होंने वैज्ञानिकों से इसके प्रोत्साहन का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेतीबाड़ी में डेढ़ दर्जन रासायनिक स्प्रे का छिड़काव करने के बाद जो पैदावार हो रही है, वह जहर है। इसके सेवन से कई तरह की बीमारियां हो रही हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र में स्प्रे करते हुए 40 किसानों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर स्प्रे की गंध से किसानों की मौत हो जाती है तो उसे फसल के सेवन से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता होगा?
यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी, बल्कि हमारे स्वास्थ्य संस्थानों की भीड़ को भी कम करने में मदद मिलेगी।
भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि विज्ञान पाठयक्रम का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण सबूतों पर निर्भर करता है और प्रासंगिक प्रश्नों को उठाकर उसके जवाब तलाशता है।
युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने से ही देश विकास के पथ पर अग्रसर हो सकता है। उपराष्ट्रपति शनिवार को हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी)के सभागार में एक निजी विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित नौवीं भारतीय युवा साइंस कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे।
बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे नायडू ने कहा कि नए भारत का सपना केवल नए विचारों और उन्हें वास्तविकता में बदलने बदलने से ही पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि नया भारत एक वैज्ञानिक भारत होगा, एक तकनीकी भारत होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान कांग्रेस जैसे मंच युवा दिमाग को ज्ञान, सूचना को साझा करने और नए विचारों के साथ प्रेरणा प्राप्त करने में सक्षम होंगे, जो भविष्य के भारत को शक्ति प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को जवाब देने के बजाय खोज के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण तथा हरित आवरण बढ़ाने के क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति एम वेंकया नायडू ने कहा कि हमें नए भारत का निर्माण करना है। ऐसा समाज जहां पर भूखमरी, भ्रष्टाचार, गरीबी, सामाजिक कुरीतियां और अशिक्षा न हो। गांव में शहर की तर्ज पर अधिक सुविधाएं प्रदान करनी होंगी ताकि एक वैज्ञानिक भारत का निर्माण हो।
देश में गरीबी और सामाजिक भेदभाव समेत कई चुनौतियां हैं, जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है। फ्रिज में रखी खाद्य सामग्री और बर्गर आदि का सेवन छोड़ पारंपरिक तरीके से पके हुए भोजन का सेवन ही करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर योग करेंगे तो रोग नहीं होंगे और योगा से योग्य बनेंगे। हमें अपने आहार और व्यवहार व जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने केंद्र सरकार के यूरिया पर मिलने वाली सबिसडी को कंपनियों के बजाय सीधे कसानों के खातों में डालने के फैसले का स्वगात किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे पहले यह सारी सबिसडी खाद बनाने वाली कंपनियों के खाते में चली जाती थी और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं होती थी।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन हमारे अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती है। वैज्ञानिकों को इस समस्या के समाधान को आगे आना चाहिए।
आज के इस वैज्ञानिक युग में भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। कहा कि वैज्ञानिक नवोन्मेष के इस दौर में हमें अपने प्राचीन ज्ञान की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और न इसका त्याग करना चाहिए।
कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से नए भारत के निर्माण में एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने नवोन्मेष, स्टार्टअप तथा युवाओं के कौशल विकास को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हमारे देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु वर्ग की है। यह उम्र खोज करने तथा सपनों की है। युवाओं की गुणात्मकता राष्ट्र के भविष्य को निर्धारित करती है।
धूमल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। इस दिशा में कृषि विवि पालमपुर, उद्यानिकी एवं वानिकी विवि महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से लोगों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए कार्य करने का आग्रह किया। कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस, देश में वैज्ञानिक सोच पैदा करने तथा विज्ञान एवं तकनीकी को बढ़ावा देने में मददगार होगी।
प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं भारत में हरित क्रांति के जनक पद्म विभूषण प्रो. एमएस स्वामीनाथन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से अपने संबोधन में कहा कि युवा वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में हिमाचल के प्रयास सराहे। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के शासन में सुधारों के लिए ‘सामूहकि प्रयासों’ की आवश्यकता पर बल दिया।
कॅरिअर प्वाइंट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. पीएल गौतम ने कहा कि पहली युवा कांग्रेस का आयोजन वर्ष 2009 में किया गया था। इस वर्ष भारतीय युवा कांग्रेस का थीम ‘नए भारत के विकास में युवा वैज्ञानिकों की भूमिका’ है। इस दौरान भारतीय युवा कांग्रेस की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।