हम आज अपनी पुरानी सांस्कृतिक धरोहर को खोते जा रहे हैं तथा पश्चिमी सभ्यता के पीछे भागते जा रहे हैं। जबकि, हमारी पुरानी सांस्कृतिक धरोहर ही हमारी पूंजी है। हमें इन्हें संजोकर रखना चाहिए। बांसुरी एक प्रेम का संदेश फैलाने का यंत्र है। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय बांसुरी वादक उस्ताद मुस्तफा हुसैन का।
नेरचौक में छुट्टियां बिताने आए हुसैन ने कहा कि कला संगीत प्रेमियों के लिए सरकार को खुलकर सामने आना चाहिए। हुसैन बांसुरी वादन में डॉक्टरेट की उपाधि ले चुके हैं। वह पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में म्यूजिक कंपोजर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
वह ‘जब वी मेट’ जैसी अनेकों फिल्मों में धुनों से प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। 7 साल की आयु से उन्होंने अपने पिता पीर बख्शी से बांसुरी वादन सीखना आरंभ कर दिया था। हुसैन ने नेरचौक पार मंडल के आग्रह पर एक प्रस्तुति भी दी।
उन्होंने विधायक इंद्र सिंह गांधी, मंडल अध्यक्ष हेमपाल राणा, एसडीएम किशोरीलाल, बीडीओ डा. बशीर खान सहित कई अधिकारियों और स्थानीय लोगों से भेंट की।