मटर, गोभी, शिमला मिर्च, मक्की, उड़द और मसूर दाल जैसी फसलों के आसपास अब जंगली जानवर नहीं फटक पा रहे। यह कोई मजाक नहीं है। जंगली जानवरों से खेतों और बागों को बचाने में जब सरकारें नाकाम रहीं तो किसानों ने खुद ही देसी उपाय कर ‘उपला टाइम बम’ बना दिया। गोबर से बने उपले में पटाखे जोड़कर रात भर धमाके किए जा रहे हैं। यह तकनीक बखूबी काम कर रही है। एक गांव से ईजाद इस तकनीक को अब कई गांवों के किसानों ने अपना लिया है।
फिलहाल इस तकनीक का इस्तेमाल सोलन की कंडाघाट तहसील की पौधना ग्राम पंचायत के रनहोग, पपलोग, सलाना, पलाह और शिमला से सटे शोघी के सरी, धार थलक, नाल थलक और सूरो आदि गांवों के किसान कर रहे हैं। उधर, कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने बताया कि वह इस तकनीक पर जानकारी हासिल करेंगे। इस तकनीक की उपयोगिता पर मंथन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल विधानसभा में बड़ी बहसों से लेकर दिल्ली में संसद तक जंगली जानवरों से खेती चौपट होने का मामला कई बार गूंजा। मनरेगा में राखे रखवाने जैसे प्रस्ताव भी बने लेकिन कुछ नहीं हुआ। जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के समाधान खोजने में भले ही सरकारें फेल हो गई हों लेकिन अब किसानों ने अपने स्तर पर एक देसी प्रयोग में सफलता पाकर कुछ राहत जरूर हासिल की है।