केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मंगलवार देर शाम ऊना में यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार के गंगा अभियान में किसी भी तरह की कमी के लिए क्षमा मांगी। कहा कि सरकार ने अपनी स्तर से यूक्रेन में फंसे भारतीय को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किया है। अनुराग ने कहा कि पहले की सरकारों ने काम किया होता तो देश के युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन नहीं जाना पड़ता। वह मंगलवार शाम को ऊना जिले के संक्षिप्त दौरे पर थे। ऊना के विश्राम गृह में करीब तीस मिनट तक यूक्रेन से लौटे युवाओं से उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर बातचीत की और उनसे ऊना तक पहुंचने की पूरी यात्रा की जानकारी ली।
उन्होंने पूछा कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों से वे कैसे व किसकी मदद लेकर अपने घर तक पहुंचे। उन्होंने भारतीय दूतावास से मिली मदद को लेकर भी फीडबैक लिया। कहा कि विद्यार्थियों के बताए अनुभव को वह पीएम नरेंद्र मोदी के साथ साझा करेंगे। उन्होंने पूछा कि क्या विद्यार्थी भारतीय झंडा साथ लेकर चल रहे थे। किसी ने उन्हें रोका तो नहीं। इस पर विद्यार्थियों ने बताया कि तिरंगा साथ होने पर वे बेझिझक पहुंचे, लेकिन बॉर्डर पर काफी इंतजार करना पड़ा।
इस मुलाकात में यूक्रेन से लौट विद्यार्थियों ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष अपनी आगामी पढ़ाई को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह वापस लौट तो आए हैं, लेकिन पढ़ाई कैसे होगी। एक विद्यार्थी ने यूक्रेन के हालात से कुछ विद्यार्थियों के सदमे में होने की जानकारी देते हुए भारत में ही उनकी आगामी पढ़ाई जारी रखने का आग्रह किया। अनुुराग ने यह मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष बात रखने का आश्वासन दिया। इस मौके पर छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, एचपीएसआईडीसी के उपाध्यक्ष प्रो. राम कुमार, डीसी राघव शर्मा, एसपी अर्जित सेन ठाकुर व विद्यार्थियों के अभिभावक मौजूद रहे।
हालात इतने खराब हो जाएंगे, सोचा न था
अनुराग से बातचीत के दौरान विद्यार्थियों ने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि अचानक हालात इतने खराब हो जाएंगे। 23 फरवरी तक कक्षाएं चल रही थीं और 24 को अचानक कक्षाएं स्थगित होने की सूचना मिली। इस बीच गोलाबारी शुरू हो गई। विद्यार्थियों की मानें तो एडवाइजरी को उनकी यूनिवर्सिटी ने हल्के में लिया और हालात बिगड़ने के बाद मुश्किलें बढ़ र्गइं।