मंडी के सुंदरनगर में एक फर्म को आम के आचार में मिलावट करना महंगा पड़ा। अभियोजना के दौरान सुंदरनगर के जेएमआईसी कोर्ट नंबर-एक के न्यायाधीश युद्धवीर सिंह ने पीएफए एक्ट 1954 के तहत आरोपी को दोषी करार देते हुए फर्म मालिक को एक साल की कैद और तीन हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी एलडी ठाकुर ने दिसंबर 2008 को सुंदरनगर के जड़ोल स्थित एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट में दबिश दी थी और शक के आधार पर आम के अचार का सैंपल भरा था। इसे जांच के लिए कंडाघाट फूड टेस्टिंग लैब भेजा गया। लैब रिपोर्ट में अचार मिलावटी पाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक अचार में कलर का उपयोग किया था। आचार में कलर नहीं मिलाया जा सकता। आर्टिफिशियल कलर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रिपोर्ट मिलने के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी कर जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी ने यह मामला जेएमआईसी कोर्ट नंबर एक सुंदरनगर में लगाया था।
ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश युद्धवीर सिंह की कोर्ट ने आरोपी मालिक को दोषी पाया और सोमवार को यह फैसला सुनाया है। दिसंबर 2008 में फर्म आचार बनाने सहित मैन्युफैक्चरर का काम करती थी।
मैन्युफैक्चरिंग का कार्य होने की सूरत में अचार में कलर कैसे आया इस बारे आरोपी मालिक कोर्ट में तथ्य पेश नहीं कर पाया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस केस की पैरवी जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी एलडी ठाकुर ने की है। दोषी मालिक ने अदालत द्वारा लगाए जुर्माने को मौके पर ही भर दिया।