बरसात के मौसम में 40 से ज्यादा अनसेफ भवन शहर पर खतरा बनकर मंडरा रहे हैं। ये कभी भी ढह सकते हैं। कुमारहट्टी हादसे के बाद अब शहरवासियों की चिंता और भी बढ़ गई है। शहर में कई भवन ऐसे हैं जो सालों पहले अनसेफ घोषित हो चुके हैं, लेकिन मालिकों और किरायेदारों के विवाद के चलते ये आज तक खाली नहीं किए गए।
कई भवन बाजारों में खड़े हैं जो दूसरे भवनों पर भी खतरा बनकर मंडरा रहे हैं। नगर निगम इन्हें खाली करने के ऑर्डर तो जारी किए हैं, लेकिन इन्हें तोड़ने की जिम्मेदारी भवन मालिक पर है। ज्यादातर भवन मालिकों ने पुराने भवन नहीं तोेड़े हैं।
निगम प्रशासन के अनुसार शहर में 300 से ज्यादा भवन ऐसे भी हैं जो जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। ज्यादातर पुराने भवन लोअर बाजार, रामबाजार, कृष्णानगर, लक्कड़ बाजार, सब्जी मंडी एरिया में है। इन इलाकों में बारिश के दौरान जहां भारी भूस्खलन का खतरा रहता है तो मुख्य बाजार होने के कारण सबसे ज्यादा भीड़ भाड़ भी यहीं रहती है। जर्जर हो चुके कई भवन कभी भी धराशायी होकर बड़ी तबाही मचा सकते हैं।
अनसेफ भवनों में रह रहे लोग
नगर निगम का कहना है कि अनसेफ भवनों को खाली करने के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लेकिन लोग खाली करने को तैयार नहीं। कई भवन ऐसे हैं जो अनसेफ हैं, लेकिन लोग इन्हें अनसेफ घोषित करने के लिए आवेदन नहीं कर रहे।
लोग मानते हैं कि यदि बहुमंजिला मकान अनसेफ होकर गिराना पड़ा तो नया भवन सिर्फ ढाई मंजिल का होगा। एक भवन के कई मालिक होने से भी जर्जर भवन न तो अनसेफ घोषित हो रहे हैं और न ही इनकी मरम्मत हो रही है। बैनमोर में शनिवार को एक पुराना भवन साथ लगते मकान पर ढह गया था।
रविवार को निगम संयुक्त आयुक्त अनिल शर्मा और उनकी टीम ने रीगल और बैनमोर वार्ड में एक पुराने भवन का निरीक्षण किया है। यह टीम सोमवार को भी सात अन्य भवनों का निरीक्षण करेगी। इसके बाद इन्हें अनसेफ घोषित करने पर फैसला होगा।
शहर में करीब 40 भवन अनसेफ हैं जिन्हें खाली करने के नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। जो लोग खाली नहीं कर रहे, उन्हें दोबारा नोटिस देंगे। - राजीव शर्मा, आर्किटेक्ट प्लानर, नगर निगम