नई शिक्षा नीति पर बैठक में कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर
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प्रदेश के राज्यपाल एवं हिमाचल प्रदेश विवि के कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन करना अत्यंत आवश्यक है। नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन को लेकर बुलाई एचपीयू के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों और कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक में राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी ढंग से इस नीति को लागू करने के लिए प्रयास करने होंगे। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम इस प्रकार बनाए जाने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को उसकी इच्छा का विषय पढ़ने के साथ पौराणिक, आधुनिक और भविष्य के लिए उनकी सोच को और अधिक निखारा जा सके। विवि के कार्यवाहक कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार विद्यार्थियों को सात वर्षों में अपना अध्ययन पूरा करना होगा।
इसमें उसके जमा अंक सुरक्षित रहेंगे (क्रेडिट बैंक), बीच में पढ़ाई छोड़कर छात्र दूसरा कार्य कर सकेगा, उसके बाद वह दोबारा अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगा। कहा कि फिलहाल स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर लिखित और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली को 70-30 के अनुपात में अपनाना प्रस्तावित है, जिसमें कौशल विकास के लिए अलग से महत्व दिया जाएगा। प्रधान सचिव शिक्षा रजनीश कुमार ने बताया कि राष्ट्र निर्माण के लिए संस्कार युक्त शिक्षा का होना अति आवश्यक है। उसी के अनुरूप नई शिक्षा नीति का निर्माण किया गया है। उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत ने प्रदेश में शिक्षा विभाग की सभी गतिविधियों और आधारभूत संरचना का विस्तृत विवरण दिया। अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य अरविंद कालिया ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।