प्रदेशभर में विभिन्न विभागों से निकाले आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से उन्हें योजनाबद्ध तरीके से नौकरियों पर वापस लेने, न्यूनतम वेतन देने और उनके लिए स्थायी नीति बनाने की मांग उठाई है। आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश राणा, जिला अध्यक्ष ललित शर्मा, सचिव विजय, उपप्रधान रीता कुमारी, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष रीना ठाकुर ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान जिले में 1850 कोरोना संक्रमित मरीज पाए गए। वहीं, इनकी देखभाल के लिए 19 आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती की गई। इन्हें 31 मार्च 2023 से सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।
इतना ही नहीं हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन शिमला में तैनात चार कर्मचारियों, नीति आयोग के तहत आकांक्षी जिला में तैनात किए गए 39 कर्मचारियों (28 स्टाफ नर्स और 11 लैब टेक्नीशियन शामिल) को 31 दिसंबर 2022 को सेवामुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं वैश्विक महामारी में तैनात 12 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकालने के बाद अब तक उन्हें मेहनताना तक नहीं मिल पाया है। बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत 75 कर्मचारियों समेत वन विभाग में कार्यरत 5 कनिष्ठ अभियंताओं को 31 मार्च 2023 को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ किया जा रहा यह सौतेला व्यवहार कदापि न्यायोचित नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि आउटसोर्स पर रखे कर्मचारियों को नौकरी से न निकाला जाए और जो निकाले गए हैं उनको दोबारा रखा जाए। आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने के साथ-साथ स्थायी पॉलिसी का निर्माण किया जाए।