झील में करोड़ों-अरबों का खजाना है लेकिन कोई भी इसे निकाल नहीं सकता। कहते हैं कि इच्छाधारी नाग इस खजाने की रक्षा करते हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस क्षेत्र में ज्यादातर सांप की तरह दिखने वाले छोटे-छोटे पौधे मिलते हैं।
देव कमरूनाग का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। श्री कृष्ण ने कमरूनाग से उसका सिर मांग लिया था और देव कमरूनाग इच्छा के अनुसार महाभारत का युद्ध देखना चाहते थे।
कमरूनाग झील के रहस्यों को जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। एसडीएम गोहर अनिल भारद्वाज ने बताया कि मेले के आयोजन के पुख्ता प्रबंध कर लिए गए हैं।
मंदिर के समीप एक झील है जहां पर मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु सोने, चांदी के जेवर और सिक्के चढ़ाते हैं। यह परंपरा पांडवों के समय से चली आ रही है। कहा जाता है कि जब पांडव देव कमरूनाग से मिलने आए तो उन्होंने भी सोने-चांदी के गहने इस झील में अर्पित किए थे।
इस अद्भुत झील का निर्माण भी पांडवों ने किया है। जब पांडव देव कमरूनाग से मिलने आए थे तो देव कमरूनाग ने कहा कि प्यास लगी है। तब भीम ने धरती पर वार किया और अपने हाथ से पानी की झील प्रकट की। साथ ही जाते समय सारा सोना-चांदी इसी झील में डाल दिया।