ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने बताया कि वर्तमान में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने वाले उत्पादकों को 15 साल के भीतर बैंक ऋण चुकाना पड़ता है। इस कारण बिजली महंगी बेचनी पड़ रही है।
ऋण चुकाने के लिए केंद्र अधिक समय देने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हिमाचल सरकार ने पहले 12 साल तक बिजली उत्पादकों से मुफ्त बिजली नहीं लेने का फैसला लिया है, ऐसा ही प्रावधान केंद्र सरकार भी हाइड्रो पावर पॉलिसी में करेगी।
इसे 6 से 10 साल तक करने पर भी विचार किया जाएगा। पर्यावरण मंजूरियां लेने की प्रक्रिया भी सरल की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर पॉलिसी से बिजली सस्ती होगी।
सम्मेलन में देश के आठ राज्यों के ऊर्जा मंत्री शामिल हुए। इनमें हिमाचल, दिल्ली, पश्चिमी बंगाल, केरल, ओडिसा, अरुणाचल, झारखंड और हरियाणा शामिल हैं।
शिमला में मौसम खराब होने के चलते मंगलवार को दिल्ली से हवाई जहाज जुब्बड़हट्टी के लिए उड़ान नहीं भर सका। इस कारण कुछ राज्यों के मंत्री शिमला नहीं आ सके। इसके अलावा कुछ मंत्री सड़क मार्ग से मंगलवार शाम करीब पांच बजे शिमला पहुंचे।
उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 31 मार्च 2019 तक देश के सभी घरों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य को समयावधि में पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। तीन करोड़ 59 लाख घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं थे।
इन घरों को बिजली से जोड़ने के लिए सरकार काम कर रही है। 78 लाख घरों में बिजली सप्लाई पहुंचा दी गई है। शेष में 31 दिसंबर तक सप्लाई पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय राज्य ऊर्जा मंत्री ने बताया कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में हिमाचल की हिस्सेदारी का मामला केंद्र सरकार के ध्यानार्थ है। इसको लेकर गृह मंत्रालय ने कानून में कुछ संशोधन करना है।
मंत्रालय के स्तर पर यह कार्य जारी है। दो बार पहले भी इस मसले को लेकर चर्चा हो चुकी है। केंद्र सरकार इस मामले को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ट्रांसफार्मर, एलटी, एचटी लाईनों तथा उप केंद्रों आदि के लिए भी सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों के भीतर प्री पेड शुल्क सुविधा वाले स्मार्ट मीटर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिस पर मानव श्रम शक्ति की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी बल्कि विद्युत नुकसान भी कम किया जा सकेगा। भारत सरकार के ऊर्जा सचिव एके भल्ला ने सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
अरूणाचल प्रदेश के ऊर्जा मंत्री टामियो टागा, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री कृष्ण लाल पवार, झारखंड के ऊर्जा मंत्री सीपी सिंह, केरल के ऊर्जा मंत्री एम.एम. मनी, उड़ीसा के ऊर्जा मंत्री सुशांत सिंह, पश्चिम बंगाल के ऊर्जा मंत्री शोभन देव चटोपाध्याय, दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन, हिमाचल के ऊर्जा
मंत्री अनिल शर्मा, भारत सरकार के नव एवं नवीकरण ऊर्जा सचिव आनंद कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरूण कपूर, एसजेबीएनएल के प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।