जांच को कमेटी गठित की है। तकनीकी सहायता को विजिलेंस ब्यूरो के साइबर सेल से मदद लेने पर विचार चल रहा है। पांच साल तक प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में छात्रवृत्ति राशि क्यों नहीं दी गई, इसकी मॉनीटरिंग कौन अधिकारी कर रहे थे। लापरवाही क्यों बरती गई। इन बिंदुओं पर जांच जारी है।
मामले की जांच में पता चला कि सचिवालय में तैनात एक आईएएस के बेटे को भी कुछ समय तक छात्रवृत्ति नहीं मिली। शिक्षा सचिव की जानकारी में मामला आने के बाद संबंधित संस्थान ने आनन-फानन में यह राशि जारी की।
जयसिंहपुर से विधायक रविंद्र कुमार ने अपने क्षेत्र के एक विद्यार्थी को दो साल तक छात्रवृत्ति नहीं मिलने और बाद में उसे संस्थान से बाहर निकालने का मामला शिक्षा सचिव से उठाया। सचिव के हस्तक्षेप के बाद छात्र को छात्रवृत्ति मिली और उसी संस्थान में पढ़ाई जारी रही।
जांच में सामने आया है कि छात्रवृत्ति के लिए पात्र एक छात्रा के नाम पर निजी शिक्षण संस्थान ने हरियाणा के हिसार में फर्जी बैंक अकाउंट खोल दिया। छात्रा के आधार कार्ड नंबर से खोले फर्जी अकाउंट में छात्रवृत्ति सहित रसोई गैस सिलिंडर की सब्सिडी भी जाती रही।
शिक्षा विभाग की जांच टीम के मुताबिक निजी शिक्षण संस्थानों ने सरकारी धनराशि हड़पने को विद्यार्थियों के नाम पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कई बैंकों में फर्जी खाते खोले। संस्थानों ने प्रवेश प्रक्रिया के समय विद्यार्थियों से बैंक अकाउंट खोलने को फॉर्म भरवाए।
बाद में प्रवेश नहीं दिया। अन्य संस्थानों में प्रवेश मिलने के बाद इन विद्यार्थियों ने अपने दस्तावेज भी आवेदन करने वाले संस्थानों से वापस नहीं लिए। इसका फायदा उठाते हुए संस्थानों ने अपने मोबाइल फोन नंबर लिखकर फर्जी खाते खोले।