किसानों-बागवानों ये भी ये घोषणाएं
किसानों को खेतीबाड़ी के लिए 32 कृषि व बागवानी फसलों की 109 नई उच्च पैदावार वाली व जलवायु अनुकूल किस्में जारी की जाएगी। इसी के साथ अगले दो साल तक एक करोड़ किसानों को प्रमाणपत्र व ब्रांडिंग द्वारा सहायता देकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की जाएगी। 10 हजार आवश्यकता आधारित जैव आदान संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। फसलों के उत्पादन, भंडारण और विपणन की व्यवस्था की जाएगी। दालों और तिलहन के लिए मिशन मोड पर काम होगा। 400 जिलों में फसलों का सर्वे किया जाएगा। इन घोषणाओं से हिमाचल के किसानों-बागवानों को लाभ होगा। प्रदेश के 90 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं तथा 70 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है। राज्य में सेब की बागवानी 5,000 करोड़ रुपये की आर्थिकी बनकर उभरी है। छह करोड़ किसानों और उनकी जमीन के ब्योरे को किसान और जमीन की रजिस्ट्री में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, 5 राज्यों में जन समर्थ आधारित किसान क्रेडिट कार्ड जारी कराए जाएंगे।
20 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण
पांच सालों में 20 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक हजार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा। पीएम आवास योजना में 10 लाख करोड़ निवेश कर शहरी गरीबों व मध्य वर्ग की आवश्यकताएं पूरी होंगी। हिमाचल में पुननिर्माण व पुनर्वास के लिए सहायता
कितना आयकर देना होगा
नई कर व्यवस्था में 17,500 रुपये तक का फायदा होगा। तीन लाख रुपये तक की आय पर आयकर शून्य रहेगा। तीन से पांच लाख पर पांच प्रतिशत, 7 से 10 लाख पर 10, 10 से 12 लाख रुपये पर 15, 12 से 15 लाख पर 20 व 15 लाख रुपये से अधिक बचत पर 30 प्रतिशत इनकम टैक्स लगेगा। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती 50,00 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये की गई है। पेंशनरों के लिए पारिवारिक पेंशन पर कटौती 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है।
जनजातीय-बहुल गांवों के लिए ये घोषणा
जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए, जनजातीय-बहुल गांवों और आकांक्षी जिलों में सभी जनजातीय परिवारों का पूर्ण कवरेज करते हुए प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे। इसमें 63,000 गांव शामिल होंगे जिससे पांच करोड़ जनजातीय लोगों को लाभ मिलेगा। हिमाचल के चंबा, लाहौल-स्पीति व किन्नौर जिले के लोगों को इसका लाभ होगा।
शहरी आवास और पीएमजीएसवाई के लिए ये घोषणाएं
बजट में घोषणा की गई है कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के अंतर्गत, 10 लाख करोड़ के निवेश से 1 करोड़ शहरी गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की आवास जरूरतों का समाधान किया जाएगा। इसमें अगले 5 वर्षों में 2.2 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता शामिल होगी। किफायती दरों पर ऋण सुविधा के लिए ब्याज सब्सिडी के एक प्रावधान की परिकल्पना भी की गई है। जनसंख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए पीएमजीएसवाई के लिए पात्र बने 25,000 ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बारहमासी सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए पीएमजीएसवाई का चरण चार आरंभ किया जाएगा।
करदाताओं को राहत, बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती : डॉ. कमल सिंह
केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डाॅ. कमल सिंह ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के कल्याण को लक्ष्य करते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश किया है। बजट में नौ क्षेत्रों कृषि, रोजगार और कौशल विकास, समावेशी प्राथमिकता और सामाजिक न्याय, विनिर्माण और सेवाएं, शहरी विकास, ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, नवाचार और अनुसंधान और अगली पीढ़ी के सुधार को प्राथमिकता दी गई। बजट मध्यम वर्ग और करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आया है। एक तरफ जहां नए टैक्स स्लैब में राहत दी गई। वहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है। पेंशनभोगियों के लिए पारिवारिक पेंशन पर कटौती को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। बजट में सभी वर्ग के निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स को खत्म करने का प्रस्ताव है। विदेशी कंपनियों पर कारपोरेट टैक्स की दर 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत कर दी गई है। ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर टीडीएस दर एक प्रतिशत से घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया है।
कृषि क्षेत्र के लिए बजट का मुख्य फोकस सहकारी क्षेत्र के विकास के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना है। एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में मुद्रा ऋण की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है और साथ ही एमएसएमई और पारंपरिक कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पाद बेचने में सक्षम बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र स्थापित किए जाएंगे। रोजगार एवं कौशल विकास के लिए बजट में पीएम का पैकेज रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन के लिए तीन योजनाएं ले कर आया है। इसके साथ-साथ उद्योग के सहयोग से कामकाजी महिला छात्रावासों की स्थापना और क्रेच की स्थापना करके कार्यबल में महिलाओं की अधिक भागीदारी को सुविधाजनक बनाना है। अगले पांच वर्षों में 20 लाख युवाओं को विभिन्न कार्यक्रमों के तहत कुशल बनाया जाएगा। 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को अपग्रेड किया जाएगा। यह बजट भारत के हर वर्ग को कुछ न कुछ राहत देने पर केंद्रित था। हालांकि बढ़ती महंगाई, बढ़ते कर्ज की स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी की स्थितियां अभी भी मोदी सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई हैं।