केंद्र सरकार हिमाचल को क्या देगी, सुक्खू सरकार की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। रेलवे समेत हिमाचल प्रदेश में अन्य आधारभूत ढांचे के लिए केंद्र से बजट मिल सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए जा रहे आम बजट से हिमाचल प्रदेश को कई उम्मीदें हैं। प्रदेश के अपने बजट में भी केंद्र से वित्तपोषित योजनाओं का बड़ा हिस्सा शामिल होता है तो स्वाभाविक रूप से राज्य का बजट केंद्रीय बजट को अध्ययन करके ही बनाया जाता है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दो पिछले हफ्ते नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले तो उस वक्त भी उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए उदार वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार की आमदनी अठन्नी तो खर्चा रुपया है।
अपनी सीमित आमदनी के अलावा विशेष राज्य की श्रेणी में होने के नाते नई दिल्ली से मिलने वाली केंद्रीय मदद, राजस्व और राजकोषीय घाटा उठाकर ही हिमाचल प्रदेश का अपना बजट तैयार होता है। यानी हिमाचल को अपने बजट अनुमानों का तैयार करते हुए इसमें साल भर लिया जाने वाला कर्ज भी शामिल करना होता है। मसलन अपने घाटों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को इस बार भी जीडीपी का छह फीसदी बजट लेने का प्रावधान करना पड़ा है। स्वाभाविक रूप से इतना ही ऋण इस बार लेना भी होगा। हरोली में बल्क ड्रग फार्मा पार्क, नालागढ़ के स्पाइस पार्क, बिलासपुर के एम्स सहित कई परियोजनाओं के लिए भी केंद्रीय बजट में व्यवस्था हो
सकती है।
हमीरपुर के मूल निवास केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के ड्रीम प्रोजेक्ट ऊना-हमीरपुर रेल लाइन को बजट में तरजीह दी जा सकती है। नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन को तलवाड़ा पहुंचाने के लिए बजट में प्रावधान किया जा सकता है। भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी योजना को लेह तक ले जाने के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए भी अतिरिक्त बजट मिल सकता है। यह रेल लाइन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के क्षेत्र से संबंधित है। इसी तरह से औद्योगिक क्षेत्र के लिए चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन को भी बजट में जगह मिल सकती है।
हिमाचल सरकार ने राज्य सडक़ों, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के लिए बजट दिलाने, सेब का आयात शुल्क बढ़ाने, केंद्र से वित्त पोषित योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे कई सुझाव पहले ही केंद्र सरकार को दे रखे हैं। नई दिल्ली में हुई बजट पूर्व बैठक में भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को यह सुझाव दिए जा चुके हैं। इन सुझावों पर केंद्र सरकार कितना गौर करती है, इसी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से हिमाचल के लिए अधिक से अधिक बजट शेयर देने की भी मांग की है।
आज आम बजट के चलते ही तीन जिलों की बैठकें आगे टलीं
आम बजट को मद्देनजर रखकर ही हिमाचल प्रदेश के योजना विभाग ने एक और दो फरवरी को रखीं विधायक प्राथमिकता बैठकों में भी कुछ बदलाव किए हैं। अब चंबा, शिमला और लाहौल स्पीति जिलों की यह बैठकें एक फरवरी के बजाय तीन फरवरी की होंगी। यह एक फरवरी की सुबह दोपहर से पहले ही होनी प्रस्तावित थीं, मगर अब आगे टाली गई हैं। एक फरवरी को दूसरे सत्र में अन्य जिलों की बैठकें भी होनी हैं। बाकी बचे जिलों की बैठकें दो और तीन फरवरी को रखी गई हैं।