हिमाचल प्रदेश के 12 लाख से अधिक एपीएल परिवारों को नए साल से सस्ते राशन के डिपुओं में आटा नहीं मिलेगा। गेहूं की कमी के चलते केंद्र सरकार ने हिमाचल के कोटे में कटौती कर दी है। इसका सीधा असर प्रदेश के एपीएल परिवारों पर पड़ेगा। उन्हें सस्ते आटे के कोटे से तीन महीने के लिए वंचित होना पड़ेगा। हालांकि, बीपीएल परिवारों को पहले की तरह गेहूं मिलता रहेगा। एपीएल राशनकार्ड धारक परिवारों को अब आटे की जगह 13 किलो चावल दिया जाएगा।
पहली जनवरी 2017 से लेकर 31 मार्च 2017 तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। अप्रैल में केंद्र सरकार इस मामले को दोबारा रिव्यू करेगी। बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से एपीएल परिवारों को सस्ते राशन के तहत आटा देने की कोई व्यवस्था नहीं है। हिमाचल सरकार एनएफएसए और लेफ्ट आउट के कोटे से बचे गेहूं को पीस कर एपीएल परिवारों को सस्ती दरों पर आटा उपलब्ध करवाती है।
अभी इतना राशन मिलता है डिपुओं में
गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को प्रदेश सरकार प्रति माह सस्ती दरों पर 13 किलो आटा राशन डिपुओं के माध्यम से उपलब्ध करवाती है। केंद्र सरकार हर महीने राशन की अलॉटमेंट करती है। गेहूं के अलॉटमेंट आधार पर ही प्रति माह आटे का कोटा फिक्स होता है। कभी 14 किलो तो कभी 13 किलो आटा प्रदेश सरकार राशन कार्ड धारकों को देती है।
राशन डिपुओं में साढ़े आठ रुपये प्रति किलो की दर से आटा दिया जाता है। बाजार में न्यूनतम 28 रुपये प्रति किलो की दर से आटा बिक रहा है। अब केंद्र सरकार के पास गेहूं की उपलब्धता कम होने से एपीएल परिवारों के सस्ते राशन के आटे पर कैंची चल गई है। हिमाचल में 12 लाख से अधिक एपीएल राशन कार्ड धारक हैं।
सस्ता आटा बंद होने से महंगाई के इस दौर में इन उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा। हिमाचल में राशन कार्ड धारकों को प्रदेश सरकार 13 किलो आटा, छह किलो चावल, प्रति सदस्य के हिसाब से छह सौ ग्राम चीनी, मसर, मसरी और रौंगी की दाल, दो रिफाइंड तेल के पैकेट और एक नमक का पैकेट देती है।
बीपीएल परिवारों को मिलता रहेगा गेहूं
खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव तरुण कपूर ने बताया है कि फिलहाल केंद्र ने गेहूं के कोटे में कटौती की है। एपीएल परिवारों को आटे के बजाय चावल देने को कहा है। अगर हमारे राशन कार्ड धारक चावल नहीं लेते हैं तो फिर केंद्र सरकार से यह मामला उठाया जाएगा। केंद्र सरकार ने पत्र लिखकर इस व्यवस्था को पहली जनवरी से 31 मार्च तक बंद करने को कहा है।
प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले वीपीएल परिवारों को पहले की तरह की गेहूं मिलता रहेगा। बीपीएल के कोटे से केंद्र सरकार ने कोई छेड़छाड़ नहीं की है। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत बीपीएल परिवारों को दो रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो की दर से चावल दिया जाता है।